जनसंघ के कालीकट अधिवेशन के साक्षी भंवरलाल ओस्तवाल का निधन

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें
(स्मृति आलेख)
दिसंबर 1967 में केरल के कालीकट में आयोजित भारतीय जनसंघ का अधिवेशन संगठन के इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय माना जाता है। इसी ऐतिहासिक अधिवेशन में प्रखर विचारक और एकात्म मानवदर्शन के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय को भारतीय जनसंघ का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया था। उस ऐतिहासिक क्षण के प्रत्यक्ष साक्षी रहे जनसंघ की संस्थापक पीढ़ी के वरिष्ठ कार्यकर्ता, मावली के पूर्व मंडल अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता श्री भंवरलाल ओस्तवाल का 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन के साथ भारतीय जनसंघ के प्रारंभिक संघर्ष, वैचारिक साधना और संगठन-निर्माण की एक जीवंत कड़ी इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई।
कुछ व्यक्तित्व केवल अपने समय के साक्षी नहीं होते, बल्कि स्वयं इतिहास के जीवंत अध्याय बन जाते हैं। भंवरलाल ओस्तवाल ऐसे ही व्यक्तित्व थे, जिनका जीवन भारतीय जनसंघ की उस गौरवशाली परंपरा का प्रतिनिधित्व करता था, जिसमें विचार, संगठन और राष्ट्र सर्वोपरि होते थे।
वे उन कार्यकर्ताओं में थे जिन्हें पंडित दीनदयाल उपाध्याय का निकट सान्निध्य प्राप्त हुआ। दिसंबर 1967 में कालीकट अधिवेशन में वे अपने साथी कार्यकर्ता श्री रामलाल खटीक के साथ मावली से केरल पहुँचे थे। उस अधिवेशन की स्मृतियाँ वे जीवनभर आत्मीयता और गर्व के साथ साझा किया करते थे। उनके लिए वह केवल एक राजनीतिक सम्मेलन नहीं, बल्कि राष्ट्रवादी विचारधारा के एक नए युग का प्रत्यक्ष साक्षात्कार था।
मावली क्षेत्र में संगठन के विस्तार और कार्यकर्ता निर्माण में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने ऐसे समय में जनसंघ का ध्वज उठाया, जब वैचारिक राजनीति आसान नहीं थी। उन्होंने अपने शांत, सरल और अनुशासित व्यक्तित्व से अनेक कार्यकर्ताओं को संगठन से जोड़ा तथा राष्ट्रहित को सदैव व्यक्तिगत हितों से ऊपर रखा।
वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में भी ओस्तवाल ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। विधि के क्षेत्र में उनकी गहरी समझ, तर्कशीलता और मर्यादित व्यवहार के कारण वे मावली बार के वरिष्ठतम एवं सम्मानित अधिवक्ताओं में गिने जाते थे। सार्वजनिक जीवन में उनकी भूमिका केवल राजनीतिक कार्यकर्ता तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे समाज और संगठन के बीच एक सशक्त सेतु बने रहे।
मुझे भी वर्षों तक आपके स्नेह और मार्गदर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। वर्ष 1990 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला पदाधिकारी के रूप में युवा मोर्चा के मावली मंडल अध्यक्ष श्री भरतभानुसिंह देवड़ा के साथ पहली बार मावली प्रवास के दौरान उनसे भेंट हुई। वही परिचय आगे चलकर आत्मीय संबंधों में परिवर्तित हो गया। वर्षों तक उनका स्नेह, मार्गदर्शन और आशीर्वाद मिलता रहा।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय पर अपने शोध कार्य के दौरान मुझे उनका विशेष सहयोग प्राप्त हुआ। उन्होंने उस दौर की अनेक दुर्लभ स्मृतियाँ, ऐतिहासिक प्रसंग और तथ्य साझा किए, जो मेरे शोध के लिए अमूल्य सिद्ध हुए। उनके अनुभवों में इतिहास बोलता था और उनकी स्मृतियों में जनसंघ के प्रारंभिक संघर्ष तथा पंडित दीनदयाल उपाध्याय के व्यक्तित्व की सजीव झलक मिलती थी।
वे पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानवदर्शन से गहराई से प्रभावित थे। उनका मानना था कि राजनीति का उद्देश्य केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक सेवा, संवेदना और न्याय पहुँचाना है। यही दर्शन उनके सार्वजनिक जीवन और संगठनात्मक कार्यशैली में स्पष्ट दिखाई देता था।
भंवरलाल ओस्तवाल का निधन केवल एक वरिष्ठ नेता का निधन नहीं है, बल्कि उस पीढ़ी के एक प्रतिनिधि का अवसान है जिसने भारतीय जनसंघ के निर्माणकाल को अपनी आँखों से देखा, अपने श्रम से उसे सींचा और अपने जीवन से उसे सार्थक बनाया। उनकी सादगी, संगठन निष्ठा, वैचारिक दृढ़ता और समर्पित जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।
By Udaipurviews

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