बड़ा रामद्वारा के प्रमुख संत श्री रामप्रकाश महाराज ने किया शुभारंभ,
नित्यकर्म एवं पंचदेवोपासना विषय साधनाओं एवं यज्ञ का व्यवहारिक प्रशिक्षण मुख्य उद्देश्य,
धर्म-संस्कृति एवं अध्यात्म के संस्कारों से ही विश्व कल्याण संभव – महंत श्री रामप्रकाश जी महाराज
बांसवाड़ा, 25 दिसम्बर/गायत्री मण्डल की ओर से सनातन परम्परा के अनुरूप नित्य कर्म तथा प्राच्यविद्याओं से संबंधित साधना पद्धतियों और पंचदेवोपासना अनुष्ठान विधानों के व्यवहारिक प्रशिक्षण के लिए सात दिवसीय प्राच्यविद्या साधना एवं प्रशिक्षण शिविर सोमवार को पीताम्बरा आश्रम में शुरू हुआ।
शुभारंभ समारोह के मुख्य अतिथि बड़ा रामद्वारा के प्रमुख महंत एवं आध्यात्मिक चिन्तक श्री रामप्रकाश जी महाराज ने हनुमत्पीठ परिसर में हनुमान महापूजा तथा दीप प्रज्वलन से सात दिवसीय शिविर का शुभारंभ किया और यज्ञ में पूर्णाहुति देने के उपरान्त आरती विधान को पूर्ण किया। समारोह की अध्यक्षता वास्तुविद् श्री चन्द्रशेखर जोशी ने की।
शिविर शुभारंभ समारोह में उपस्थित साधक-साधिकाओं के समक्ष अपने उद्गार व्यक्त करते हुए महंत श्री रामप्रकाश जी महाराज ने पुरातन एवं परम्परागत धर्म-अध्यात्म एवं कर्मकाण्ड की धाराओं से नई पीढ़ी और जिज्ञासुओं को प्रशिक्षित करने की दिशा में गायत्री मण्डल द्वारा किए जा रहे प्रयास की सराहना की और कहा कि इस दिशा में विगत दशकों में कई ऐतिहासिक आयाम स्थापित हुए हैं।
जीवन लक्ष्य को आत्मसात करें-उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ मौलिक संस्कारों, मानवीय गुणों और सामाजिक तथा राष्ट्रीय सरोकारों के प्रति समर्पित भावनाओं को होना नितान्त जरूरी है और इन्हीं का आश्रय पाकर मानव अपने जीवन लक्ष्यों में सफल हो सकता है।
आरंभ में आध्यात्मिक चिन्तक पं. सुशील त्रिवेदी, गायत्री मण्डल के उपाध्यक्ष श्री अनिमेष पुरोहित, सचिव पं. विनोद शुक्ल, सह सचिव पं. सुभाष भट्ट एवं कार्यक्रम समन्वयक पं. मनोज नरहरि भट्ट ने महंत श्री रामप्रकाश जी महाराज का पुष्पहारों से स्वागत और शॉल ओढ़ाकर अभिनंदन किया।
इस अवसर पर सामूहिक आरती विधान में श्री राजेश शर्मा, श्री चन्द्रेश व्यास, श्रीमती शारदा मईड़ा, सुश्री नेहा मईड़ा आदि साधकों एवं साधिकाओं ने हिस्सा लिया।
पंचदेव उपासना विषयक साधना एवं एवं यज्ञ विधान- शिविर के पहले दिन सोमवार को श्रीविद्या परिषद के संयोजक पं. आशीष पण्ड्या(पिण्डारमा) के आचार्यत्व में गायत्री सहस्रनामावली, बगलामुखी अष्टोत्तरशत नामावली, हनुमान मंत्रों, गाणपत्य, शैव, शाक्त, सौर एवं वैष्णव मंत्रों तथा वैदिक ऋचाओं से यज्ञ किया गया।
इन अनुष्ठानों में पीताम्बरा परिषद के सह संयोजक पं. मधुसूदन व्यास(कुशलगढ़), कार्यकारिणी सदस्य पं. अरुण व्यास एवं पं. कमलकान्त भट्ट, सह आचार्य पं. जय रणा, पं. गिरीश जोशी, पं. दिलीप अधिकारी आदि साधकों ने हिस्सा लिया और विभिन्न उपचारों के साथ यज्ञ में आहुतियां दीं।
संध्योपासना का प्रशिक्षण प्रमुख रहेगा-शिविर के पहले दिन जिज्ञासुओं को संध्योपासना से संबंधित प्रशिक्षण प्रदान किया गया। संध्योपासना का प्रशिक्षण एवं प्रयोगात्मक मध्याह्न एवं सांय संध्या का क्रम रोजाना जारी रहेगा। उल्लेखनीय है कि इस शिविर में सभी आयु वर्ग के जिज्ञासुओं को सनातन धर्म एवं परम्पराओं से जुड़ी हुई वांछित साधनाओं का प्रयोगात्मक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
बहुआयामी आरंभिक प्रशिक्षण दिया जाएगा-शिविर के दौरान् साधनाओं व उपासना की विभिन्न पद्धतियों को सीखने के इच्छुक जिज्ञासुओं को अनुभवी प्राच्यविद्या विशेषज्ञों द्वारा त्रिकाल संध्योपासना, रूद्राभिषेक, दुर्गा सप्तशती, पीताम्बरा (बगलामुखी) एवं ललिताम्बिका साधना, ललितासहस्रनाम एवं त्रिशती, विष्णु सहस्रनाम, पंचदेव उपासना, श्रीसूक्त, कनकधारा स्तोत्र, पुरुष सूक्त, रूद्रसूक्त, पंचअथर्वशीर्ष, शिवमहिम्न स्तोत्र सहित विभिन्न स्तोत्रों, यज्ञवेदी निर्माण, विभिन्न मुद्राओं एवं यंत्रों के सृजन आदि का आरंभिक एवं प्रयोगात्मक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
मंगलवार को दत एवं ललिता उपासना तथा यज्ञ-शिविर अवधि में 26 दिसम्बर, मंगलवार को पूर्णिमा पर दत्त जयन्ती पर दत्तात्रेय साधना एवं यज्ञ, दत्त बावनी के सामूहिक पाठ तथा रात्रि में चन्द्रबिम्ब के समक्ष ललिताम्बिका पूजन-अर्चन का अनुष्ठान किया जाएगा।
शिविर में जिज्ञासुओं को उपासना के प्रकारों तथा विभिन्न साधना पद्धतियों, आध्यात्मिक विषयों पर जिज्ञासाओं का समाधान सत्र होगा, जिसमें प्राच्यविद्यामर्मज्ञों द्वारा सनातन धर्म एवं आध्यात्मिक परम्पराओं की धर्म शास्त्रीय जानकारी से लाभान्वित किया जाएगा।
विभिन्न विषयों पर वार्ता-संगोष्ठियां होंगी-शिविर अवधि में प्रतिदिन प्राच्यविद्या और आध्यात्मिक विषयों पर विषय विशेषज्ञों की वार्ता व चर्चा संगोष्ठी का आयोजन होगा। इसमें मुख्य रूप से संध्योपासना की अनिवार्यता, स्वर विज्ञान, पंचदेव उपासना की सनातन परम्परा, ईष्ट भजन, सिद्धि एवं भगवद्कृपा प्राप्ति के रहस्य, निष्काम भक्ति के प्रयोग, सामान्य पंचाग ज्ञान व वास्तु, ज्योतिष विधा आदि विषय शामिल हैं। आयोजन समिति की इस बैठक में शिविर आयोजन की विभिन्न व्यवस्थाओं को लेकर दायित्व सौंपे गए।
आगामी 31 दिसम्बर तक रोजाना यह शिविर प्रातः 11 बजे से सायंकाल 5 बजे तक आयोजित होगा। शिविर का समापन 31 दिसम्बर, रविवार की रात्रि को होगा।
नियमित अनुष्ठान एवं यज्ञ यथावत जारी रहेंगे-इस दौरान् हनुमत्पीठ परिसर में नियमित रूप से जारी गायत्री जप, गायत्री एवं हनुमान यज्ञ, रोजाना हनुमान चालीसा के न्यूनतम 51 सामूहिक पाठ, श्रीराम विजय मंत्र संकीर्तन, दैनिक आरती आदि विभिन्न प्रकार की साधनाओं का क्रम यथावत जारी रहेगा।
—000—
