उदयपुर. महावीर नवयुवक मंडल सुंदरवास द्वारा आयोजित 11 दिवसीय पंच तीर्थ यात्रा के अंतर्गत 350 यात्रियों ने जैन धर्म के सर्वोच्च तीर्थ श्री सम्मेद शिखरजी (पारसनाथ पर्वत) की निर्वाण भूमि की दुर्गम यात्रा आनंदपूर्वक संपन्न की। यह तीर्थ स्थल जैन धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है, जहां 24 तीर्थंकरों में से 20 ने मोक्ष प्राप्त किया था।मंडल के मंत्री भूपेश खमेसरा ने बताया कि जैन समाज में प्रत्येक व्यक्ति की जीवन में एक बार इस दुर्गम तीर्थ की यात्रा करने की इच्छा होती है। इसी भावना को साकार करने के लिए मंडल के ऊर्जावान अध्यक्ष प्रवीण नाहर के नेतृत्व में पूरी टीम ने यात्रा की रूपरेखा तैयार की। यात्री 24 दिसंबर को रवाना हुए थे।27 दिसंबर को मुख्य शिखर यात्रा सफलतापूर्वक पूरी करने के बाद यात्रियों ने भगवान महावीर स्वामी के जन्म स्थल क्षत्रिय कुंड, जन्म कल्याणक, दीक्षा कल्याणक तथा केवलज्ञान कल्याणक स्थलों के दर्शन किए।संगठन मंत्री महावीर वया ने कहा कि तीर्थ पर ठहरने, भोजन तथा यातायात की उत्कृष्ट व्यवस्था की गई, जिसकी सभी ने सराहना की। यात्रियों ने एक-दूसरे के प्रति सौहार्दपूर्ण सहयोग प्रदर्शित किया।यात्रा संयोजक आशुतोष धींग ने बताया कि इस यात्रा में सुंदरवास परिवार के साथ-साथ राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात तथा मध्य प्रदेश से युवा एवं बुजुर्ग शामिल हुए। सभी ने पूर्ण उत्साह से भाग लिया। विशेष रूप से 80 वर्षीय बुजुर्गों का जोश प्रशंसनीय रहा, जो सबसे आगे पहुंचे। पुरुष, महिलाएं, बच्चे एवं बुजुर्ग सभी ने भक्ति कार्यक्रमों, प्रतियोगिताओं तथा खेलों में आनंदपूर्वक हिस्सा लिया।महावीर स्वाध्याय मंडल की टीम तथा अध्यक्ष प्रवीण नाहर ने 2 जनवरी तक संपन्न हो रही इस मंगलकारी यात्रा के लिए सभी यात्रियों की सुखद यात्रा की कामना की है।
350 यात्रियों ने पूर्ण की श्री सम्मेद शिखरजी की दुर्गम पदयात्रा
