उदयपुर। नगर निगम द्वारा यूआईटी से हस्तांतरित कॉलोनियों में खाली भूखंडों को खुर्द-बुर्द करने के मामले में जनता सेना को बड़ी सफलता मिली है। लगातार इस मामले में जनता सेना ने लड़ाई लड़ी और जब स्थानीय स्तर पर सफलता नहीं मिली तो जनहित याचिका दायर करने का निर्णय लिया इस पर याचिकाकर्ता प्रार्थी जनता सेना के प्रदेश समन्वयक मांगीलाल जोशी ने याचिका दायर की। बुधवार को हाई कोर्ट ने सचिव स्वायत्त शासन विभाग, नगर निगम उदयपुर, नगर विकास प्रन्यास उदयपुर, जिला कलेक्टर उदयपुर और महापौर नगर निगम उदयपुर कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए इन से जवाब मांगा है। विपक्षियों को नोटिस का जवाब देने के लिए अधिकतम चार सप्ताह का समय दिया है।
भूखंड का महाघोटाला इस तरह आया सामने:-
यूआईटी द्वारा हस्तांतरित कॉलोनियों में कई प्लॉट खाली थे । जिस पर भूमाफियाओं ने कब्जे कर लिए और निगम ने इनको रिकॉर्ड में लिए बिना आवंटन पत्र जारी कर दिए।
जारी आवंटन पत्र में तीस से पचास साल के मध्य की अलग अलग तारीखें और लिखावट से वे पचास साल पुराने नहीं लगने से संदेह के घेरे में आ गए।
आवंटन पत्र में जिन लोगों के नाम है तथा प्लॉट पर कब्जे है वे निगम द्वारा जांच के समय आवश्यक दस्तावेज के साथ सामने नहीं आए और इस तरह कई भूखंड स्वतः बेनामी हो गए।
आवंटन पत्र में राजसमंद ,चित्तौड़गढ़ के साथ साथ बाहरी राज्यों के निवासी भी थे जो वर्तमान में उदयपुर में ही अन्य जगहों पर रहते हैं पर जांच के समय मौके पर कई लोग नहीं मिले।
निगम द्वारा गहन जांच में गड़बड़ियां मिली तो निगम ने चालीस भूखंड अपने कब्जे में ले लिए। कुछ पर निगम ने एफ आई आर भी दर्ज करवाई। फिर मामले को सरकार ने एसओजी में भेज दिया। फिलहाल एसओजी में भी मामला ठंडे बस्ते में ही था कि कालका माता गणेश नगर निवासी मांगी लाल जोशी मुख्य समन्वयक जनता सेना ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी। हाई कोर्ट में सुनवाई के बाद उपरोक्त पांचों को हाई कोर्ट ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
