सनातन और जैन संस्कृति दोनों में चातुर्मास का विधान
वासुपूज्य मन्दिर में साध्वी श्रीजी के नियमित व्याख्यान आरंभ उदयपुर। श्री जैन श्वेताम्बर वासुपूज्य महाराज मंदिर में शुक्रवार को साध्वी डॉ. संयम ज्योति श्रीजी ने कहा कि चतुर्दशी से आज व्याख्यान आरंभ हुए है। चातुर्मास के ये चार महीने स्थिरता का सूचक है। वर्षाकाल में जीवों की उत्पत्ति होती है। परमात्मा ने चार महीने कहीं नही जाने का आदेश दिया। व्यवसाय में इन चार महीनों में मंदी होती है। उन्होंने कहा कि इस समय साधु संतों की निश्रा में ज्ञानार्जन करना चाहिए। जहां चातुर्मास नही होते, वहां वर्षा नही होने वाले क्षेत्रों जैसी स्थिति होती है। सनातन और जैन संस्कृति…
