जीवन भर सभी को सहारा बनाने वाला मनुष्य मृत्यु के समय बेसहारा हो कर जाताःसाध्वी डॉ.संयमलता
उदयपुर। सेक्टर 4 श्री संघ में विराजित श्रमण संघीय जैन दिवाकरिया महासाध्वी डॉ श्री संयमलताजी म. सा.,डॉ श्री अमितप्रज्ञाजी म. सा.,श्री कमलप्रज्ञाजी म. सा.,श्री सौरभप्रज्ञाजी म. सा. आदि ठाणा 4 के सानिध्य में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए महासती संयमलता ने कहा नादान आदमी अपनी जिंदगी में ना जाने किस-किस को सहारा बनाता है। भूख लगती है तो रोटी का सहारा लेता है, प्यास लगती है तो पानी का सहारा लेता है, दीवार सहारा बनी, रोटी सहारा बनी, कोठी सहारा बनी, लाठी को सहारा बना दिया, बेटे बेटी को सहारा बना लिया, सब को सहारा बनाने के बाद भी…
