200 बच्चें ले रहे संस्कार शिक्षा का प्रशिक्षण

उदयपुर। श्री कुंद कुंद कहान वीतराग विज्ञान शिक्षण समिति उदयपुर द्वारा हिरण मगरी सेक्टर 4 स्थित श्री वर्धमान जैन श्रावक संस्थान उदयपुर में आयोजित आवासीय बाल संस्कार शिक्षण शिविर में बालकों को संस्कार का शिक्षण दिया जा रहा है।
श्री समयसार नियमसार एवं अष्टपाहुड मंगल विधान का शुभारम्भ कल से हुआ। विधान एवं आवासीय बाल संस्कार शिविर मुख्य रूप से प्रवचनकार विद्वान डॉक्टर मनीष सेठ मेरठ, पंडित अंकुर शास्त्री भोपाल के सानिध्य में आयोजित हो रहा है साथ ही बाल कक्षा विशेषज्ञ विद्वान पंडित चिराग शास्त्री जबलपुर, पंडित आशीष शास्त्री टीकमगढ़ विशेष रूप से उपस्थित हुए हैं। उनके साथ ही स्थानीय विद्वानों में पंडित राजकुमार शास्त्री, डॉक्टर महावीर प्रसाद शास्त्री, पंडित जगदीश पवार, पंडित सुरेश शास्त्री, पंडित ऋषभ शास्त्री, पंडित हेमचंद्र शास्त्री, पंडित जिनेंद्र शास्त्री, पंडित संदीप शास्त्री, पंडित अमित शास्त्री, पंडित तपिश शास्त्री, पंडित गजेंद्र शास्त्री, पंडित नितेश शास्त्री, पंडित जय शास्त्री, पंडित प्रशांत शास्त्री, पंडित अनुभव शास्त्री, पंडित दीपक शास्त्री, पंडित सम्मेद शास्त्री, पंडित अमन शास्त्री, पंडित भावेश शास्त्री के साथ ही विदुषी अनुभूति शास्त्री, विदुषी श्रद्धा शास्त्री, भावीका शास्त्री एवं शाश्वत विदूषिया शामिल है।
सोमवार को प्रथम विधान के तहत विधान आमंत्रणकर्ता एवं मुख्य कलश विराजमानकर्ता रोशन लाल कुलदीप फान्दोत परिवार थे। इनके साथ ही राजकुमार भरत भोरावल परिवार, मुकेश कचरू लाल मेहता परिवार, अमन सिंह जी परिवार एवं मुकेश जैन बड़ोदिया परिवार प्रमुख रूप से उपस्थित थे। इसके साथ ही विधान में जिनवाणी विराजमानकर्ता श्रीमती कनी बाई रटोडिया परिवार, सरोज पत्नी विनोद रटोडिया परिवार, श्रीमती पलक पत्नी आकाश बोहरा परिवार, सुश्री पृथ्वी दिनेश बुलावत परिवार उदयपुर शामिल थे।
प्रारंभ में आवासीय बाल संस्कार शिविर में करीब 200 बच्चों को विद्वानों द्वारा प्रशिक्षित किया गया। उन्हें जीवन जीने की कला बताई गई। भोजन करते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, भोजन करते समय क्या करना है क्या नहीं करना है इसके बारे में उन्हें संस्कार प्रदान किए गए। विद्वानों ने बताया कि भोजन करते समय मौन साधना बहुत जरूरी है। शिविर समाप्ति के पश्चात सभी बच्चों को सामूहिक भोजन करवाया गया। जिनमें सभी बच्चों को मौन साधना की शिक्षा दी गई। बच्चों ने भोजन करते समय केवल इशारों में ही समझा और समझाया।
इसके बाद विद्वानों के सानिध्य में मंडप में मंत्रोच्चार बीच पुर्ण विधि विधान के साथ कलश स्थापना एवं जिनवाणी की स्थापना की गई। मंगलाचरण एवं आचार्य कुंदकुंद देव के चरणों में अर्घ्य समर्पण के साथ ही विधान प्रारंभ हुआ।

By Udaipurviews

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