मेवाड़ की फिजा में घुलेगा शास्त्रीय संगीत का रस
-बॉलीवुड की पार्श्व और शास्त्रीय गायिका रोंकिनी की परफोरमेंस रहेगी खास
-प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना डॉ. आरती सिंह एंड ग्रुप की प्रस्तुति होगी मनमोहक
उदयपुर, 22 फरवरी। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की ओर से शिल्पग्राम में एक और सांस्कृतिक पेशकश के रूप में “ऋतु बसंत उत्सव” का आगाज शुक्रवार शाम से होगा। इस 3 दिवसीय उत्सव में क्लासिकल के नामचीन आर्टिस्ट उम्दा प्रस्तुतियां देंगे। केंद्र का यह शास्त्रीय संगीत व नृत्य को समर्पित प्रोग्राम साल 2016 से निरंतर नई ऊंचाइयां छू रहा है और इसमें देश के कई प्रसिद्ध कलाकार मेवाड़ के कलाप्रेमियों के रू-ब-रू हो चुके हैं।
केंद्र के निदेशक फुरकान खान ने बताया कि 25 फरवरी तक रोजाना शाम 6:30 बजे शुरू होने वाले कार्यक्रमों की पहली कड़ी के रूप में शुक्रवार को बॉलीवुड के कई गानों में अपनी दिलकश आवाज का जादू बिखेर चुकीं शास्त्रीय गायिका रोंकिनी गुप्ता विलंबित ख्याल और द्रुत ख्याल से श्रोताओं के हृदय को झंकृत करेंगी। उन्होंने ग्वालियर घराने के प्रतिपादक चंद्रकांत आप्टे से प्रशिक्षण लिया और उस्ताद दिलशाद खान, उस्ताद राशिद खान के साथ अपने कौशल का प्रदर्शन कर उसे और निखारा है। इनके साथ ही इसी दिन प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना और कमलादेवी संगीत महाविद्यालय की प्रोफेसर डॉ.आरती सिंह अपने ग्रुप के साथ कथक की श्रेष्ठ भाव-भंगिमा पूर्ण पेशकश से कथक की बारीकियों को उकेरेंगी। दूसरे दिन शनिवार को पंडित राजकुमार मजूमदार, उस्ताद असगर हुसैन व उस्ताद अख्तर हसन वायलिन-संतूर की उम्दा जुगलबंदी रिझाएगी, तो राजस्थान के शास्त्रीय गायक सौरभ वशिष्ठ शाम में क्लासिकल रंग भरेंगे। उत्सव के अंतिम दिन रविवार को हर दिल अजीज पंडित मोरमुकुट केडिया व पंडित मनोज केडिया सरोद-सितार की दिल को छू लेने वाली जुगलबंदी पेश करेंगे। वहीं, देश के जाने-माने कोरियोग्राफर शास्त्रीय नृत्य नाटिकाओं की कई अविस्मरणीय प्रस्तुतियां दे चुके संतोष नायर अपने ग्रुप के साथ नृत्य स्तुति से उत्सव को पूर्णता देंगे।
तीनों दिन सबके लिए प्रवेश निशुल्क-यह कार्यक्रम 23 फरवरी से प्रतिदिन शिल्पग्राम के मुक्ताकाशी रंगमंच पर शाम 6:30 बजे से होगा। आमजन के लिए इसमें तीनों दिन प्रवेश निशुल्क रहेगा।
उम्दा क्यूरेशन… शानदार सिक्वेंस-किसी भी कार्यक्रम की सबसे बड़ी खूबी होती है उसको खूबसूरती से संजोना यानी क्यूरेट करना। यह खूबी इस उत्सव के तीनों दिन साफ झलकेगी। मसलन, पहले दिन क्लासिकल गायन के साथ कथक, दूसरे दिन गायन के बाद तीन मशहूर संगीतज्ञों के वाद्ययंत्रों की जुगलबंदी और शास्त्रीय गायन का संगम तथा तीसरे दिन दो प्रसिद्ध संगीतज्ञों का सरोद-सितार के इंस्ट्रूमेंटल डुएट के साथ वर्ल्ड क्लास नृत्य स्तुति का संयोजन देखने काे मिलेगा।
दूसरे दिन शनिवार के आकर्षण-
वायलिन-संतूर की जुगलबंदी और शास्त्रीय गायन
उदयपुर। पश्चिम क्षेत्र संस्कृति केंद्र की ओर से शुक्रवार को शिल्पग्राम में चल रहे ‘ऋतु बसंत’ उत्सव में शनिवार को पं.राजकुमार मजूमदार, उस्ताद असगर हुसैन और उस्ताद अख्तर हसन की वायलिन और संतूर की खूबसूरत जुगलबंदी और जयपुर के शास्त्रीय गायक सौरभ वशिष्ठ की गायकी रहेगी।
पं.राजकुमार मजूमदार देश के बहुमुखी संतूर वादक हैं। इन्होंने अपनी अद्वितीय प्रदर्शन शैली और ध्वनि क्षमता के लिए खास पहचान बनाई है। उन्होंने दोनों हाथों से संतूर बजाने की आत्मिक शैली में महारत हासिल की है। इनके पंडित प्रशांत मजूमदार ने तबला वादन में प्रशिक्षित किया था। ने 1997 में एक दुर्घटना के बाद संतूर सीखा। उनकी लगन और निष्ठा को देख संतूर महागुरु पंडित भजन सोपोरी ने उन्हें शिष्य बनाया था। ये आज के देश के चुनिंदा उम्दा संतूर वादक में शुमार हैं।
पंडित मजूमदार के साथ वायलिन की जुगलबंदी करने वाले उस्ताद असगर हुसैन ने पिता उस्ताद अनवर हुसैन से प्रशिक्षण पाने के बाद अपनी एक विशेष शैली प्रतिपादित की, जो गायकी और तंत्रकारी आंग (वाद्य और गायकी स्टाइल) का अद्भुत मिश्रण है। असगर की तान, खटका, गामक, मींड, सुव्यवस्थितता, सौंदर्य और रागों की पवित्रता, विभिन्न लयकारी की विविधता में महारत इन्हें देश के आला वायलिन वादकों में शुमार कराती है।
इनके साथ तबले पर फर्रूखाबाद घराने के उस्ताद अख्तर खान संगत करेंगे। ये आकाशवाणी और दूरदर्शन के टॉप ग्रेड संगीतकार हैं।
इसी दिन बनारस, ग्वालियर और किराना घरानों के गायक जयपुर के सौरभ वशिष्ठ अपनी रेशमी आवाज में शास्त्रीय गायन से शिल्पग्राम का वातावरण शास्त्रीय बनाएंगे। आकाशवाणी के मानद कलाकार सौरभ ने प्रतिष्ठत राजस्थान संगीत नाटक अकादमी और महाराणा कुंभा संगीत रत्न अवॉर्ड हासिल किए हैं। इसके साथ ही उन्हें आगरा के संगीत कला केंद्र ने ‘नाट साधक’ की उपाधि से नवाजा है।
