उदयपुर। यूनाइटेड फेडरेशन ऑफ मिनरल प्रोड्यूसर्स के पदाधिकारियों ने खान एवं भू-विज्ञान विभाग के निदेशक एम. पी. मीणा से शिष्टाचार भेंट कर अध्यक्ष गुरप्रीत सिंह सोनी, सचिव डॉ. हितांशु कौशल एवं कोषाध्यक्ष सौरभ मंत्री ने खनन पट्टा धारकों से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों पर एक औपचारिक ज्ञापन भी प्रस्तुत किया। ज्ञापन में अनुरोध किया गया कि जिन खनन पट्टों के एक्सटेंशन के प्रकरण लंबित हैं, उनमें विभाग द्वारा सकारात्मक सहयोग प्रदान किया जाए। प्रतिनिधि मण्डल ने उनके कार्यकाल के एक्सटेंशन पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।
फेडरेशन की ओर से अवगत कराया गया कि उसके सभी सदस्य वैध खनन पट्टा धारक हैं तथा उन्होंने राजस्थान माइनर मिनरल कन्सेशन नियम, 2017 के प्रावधानों का पूर्णतः पालन किया है। कई सदस्यों द्वारा नियम 9(3।) के अंतर्गत खनन पट्टा विस्तार हेतु निर्धारित प्रीमियम भी जमा कर दिया गया है।
सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन सुओ मोटू रिट याचिका (सिविल) संख्या 10/2025 अरावली पर्वतमाला एवं संबंधित मुद्दों की परिभाषा तथा दिनांक 09.05.2023 के आदेश के अनुपालन में खनन पट्टों के अवधि वृद्धि एवं खनन कार्यवाही को स्थगित रखा गया है।
फेडरेशन ने यह भी स्पष्ट किया कि उक्त स्थिति पूर्णतः न्यायालयीन विचाराधीन है। इस संदर्भ में राजस्थान माइनर मिनरल कन्सेशन नियम, 2017 के नियम 9(4) का उल्लेख करते हुए बताया गया कि न्यायालय के आदेशों के कारण बंद रहने वाली अवधि को डाईज एण्ड नॉन माना जाना चाहिए तथा इस अवधि के लिए कोई डेड रेंट देय नहीं है।
इसके अतिरिक्त फेडरेशन के पदाधिकारियों ने अरावली क्षेत्र में खनन से संबंधित विषय पर भी अपना पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि न्थ्डच् द्वारा अरावली पर्वतमाला की वास्तविक स्थिति, भौगोलिक लोकेशन एवं खनन पट्टों के तथ्यात्मक आंकड़ों सहित माननीय सर्वोच्च न्यायालय में एक इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशन (प्।) भी प्रस्तुत की गई है। फेडरेशन के अनुसार, अरावली क्षेत्र में खनन का क्षेत्रफल कुल क्षेत्र का लगभग 1þ ही है, जो अत्यंत सीमित है। साथ ही यह भी रेखांकित किया गया कि राजस्थान देश में क्रिटिकल मिनरल्स एवं रेयर अर्थ मिनरल्स का प्रमुख स्रोत है, जिससे खनन उद्योग राज्य एवं राष्ट्र की अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
फेडरेशन ने बताया कि यदि वैध खनन गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाता है, तो इससे अवैध खनन को बढ़ावा मिलेगा, जो पर्यावरण एवं राजस्व दोनों के लिए हानिकारक होगा। न्थ्डच् ने यह भी कहा कि राजस्थान को खनन एवं खनिज विकास के क्षेत्र में देश का एक आदर्श (तवसम उवकमस) राज्य बनाया जाना चाहिए, जहाँ विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित हो। इसी दृष्टिकोण से फेडरेशन ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय से अनुरोध किया है कि अरावली क्षेत्र में 4þ तक वैज्ञानिक एवं नियंत्रित खनन की अनुमति प्रदान की जाए, जिससे सतत विकास एवं पर्यावरण संरक्षण दोनों सुनिश्चित हो सकें।
फेडरेशन ने आशा व्यक्त की कि विभाग खनन और खनिज उद्योग की इन वास्तविक एवं न्यायोचित समस्याओं के समाधान हेतु सहानुभूतिपूर्ण एवं सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएगा।
लंबित खनन पट्टों के एक्सटेंशन के सन्दर्भ में सहयोग प्रदान करनें हेतु खान निदेशक को ज्ञापन सौंपा
