नकारात्मक विचारों पर नियंत्रण के लिए मन को बनाएं जागरूक प्रहरीःसाध्वी विद्युतप्रभाश्री
उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में मंगलवार को नवपद ओली की आराधना के तीसरे दिन आचार्य पद की महत्ता पर धर्मसभा आयोजित हुई। साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने श्रावक-श्राविकाओं को संबोधित करते हुए आचार्य की योग्यता, उनके नेतृत्व, पद के चयन और आध्यात्मिक जिम्मेदारियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आचार्य पद के प्रति हृदय में अहोभाव और श्रद्धा होना आवश्यक है। आचार्य का जीवन अनुशासन, ज्ञान और पंचाचार की साधना पर आधारित होता है।
साध्वीश्री ने कहा कि जीवन में विचारों का चयन अत्यंत महत्वपूर्ण है। मन में नकारात्मक विचार आना स्वाभाविक है, लेकिन उन पर नियंत्रण रखना हमारी जिम्मेदारी है। जिस प्रकार संपत्ति की सुरक्षा के लिए चौकीदार रखा जाता है, उसी प्रकार मन की रक्षा के लिए जागरूकता रूपी प्रहरी आवश्यक है। नकारात्मक विचारों को समय रहते पहचानकर रोकना चाहिए, क्योंकि वे जीवन और समाज दोनों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
साध्वीश्री ने पंचाचार के संदर्भ में समझाया कि विचारों का सही चयन करने के बाद उनके साथ सकारात्मक संबंध स्थापित करना भी आवश्यक है। पूर्व आचार्यों की शिक्षाओं को समझना और उनके बताए मार्ग पर चलना ही सच्ची साधना है। साधु-संत, श्रावक-श्राविकाएं अपने गुरु और आचार्य के मार्गदर्शन में आगे बढ़ते हैं। इसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में अनुशासन और सही मार्गदर्शन को महत्व देना चाहिए। ट्रस्ट अध्यक्ष राज लोढ़ा ने बताया कि धर्मसभा में साध्वी प्रज्ञानजना श्रीजी, साध्वी नमन रुचि श्रीजी, साध्वी योगरुचि श्रीजी और साध्वी तन्मय रुचि श्रीजी ने मधुर गीत प्रस्तुत किया।
नवपद ओली के तीसरे दिन आचार्य पद की आराधना पर दिया मार्गदर्शन
