उदयपुर 11 सितम्बर / शिकागों में विश्व हिन्दू सम्मेलन दिवस पर जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ डिम्ड टू बी विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित सगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. एस. एस. सारंगदेवोत ने कहा कि 11 सितम्बर 1893 का दिन अदभूद था उस दिन विवेकानंद जी ने भारत को एक नई उंचाईया दी जिसमें भारत को विश्व गुरू के रूप में स्थापित किया। उन्होने अपने अभिभाषण में सहिष्णुता एवं सार्वभौतिकब चरितार्थ का पाठ पठाया जो हमारे भारत की वसुदैव कुटुम्बकम की युक्ति को चरितार्थ करता है। विवेकानंद युवाओं का हमेशा कहा करते थे कि एक विचार लो, उस विचार को अपना जीवन बना लो, उसके बारे में सोचो , उसके सपने देखों, उसी विचार को जियो और मन, मस्तिष्क, मांशपेशिया, नसो, शरीर के पूरे हिस्सें को उस विचार को डूब जाने दो और अन्य विचारों को बाहर निकाल दो। विवेकानंद ने युवाअेां को कहा करते थे उठो, जागो और तब तक मत रूको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए। युवा अपने आप को कमजोर न समझे।
विवेकानंद ने सहिष्णुता, सार्वभौमिक चरितार्थ स्तुति का पाठ पढ़ाया – प्रो. सारंगदेवोत
