उदयपुर। ऐश्वर्या कॉलेज और रोटरेक्ट क्लब ऑफ़ ऐश्वर्या के संयुक्त तत्वाधान में विश्व फोटोग्राफी दिवस मनाया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा प्रकृति के अलग-अलग दृश्यो को कैमरे में कैद किया गया।
इस अवसर पर रोटरेक्ट क्लब ऑफ़ ऐश्वर्या की अध्यक्ष ,ऐश्वर्या सिंह ने कहा कि विश्व फोटोग्राफी दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य फोटोग्राफी की कला को बढ़ावा देना है।आज के दिन कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और फोटो एग्जीबिशन लगाई जाती है। साथ ही उन्होंने कहा की फोटोग्राफी की कला, विज्ञान और शिल्प के बारे में सभी को जागरूक करने के लिए यह दिन मनाया जाता है। कला के क्षेत्र से जुड़े व्यक्तियों के लिए अपने कौशल का प्रदर्शन करने और अपने काम के लिए वैश्विक मान्यता हासिल करने का एक अवसर है।
सेल इंचार्ज मंजीत सुथार ने कहा कि फोटोग्राफी एक अद्भुत कला है जो अनमोल पलों को सहजने और संदेश देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस कार्यक्रम में कुमुदी लावण्या ,उपासना , रितु, नवल परमार, रितिका पूर्बिया, सुरभि तेली ,जितेंद्र पूर्बिया,गर्विता ,हिमांशी, रजत, आदि विद्यार्थियों ने भाग लिया।
मन सबसे बड़ा दोस्त तो दुश्मन भीःसुकनमुनि
उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ पंचायती नोहरा उदयपुर के तत्वावधान में आयोजित धर्म सभा में जैन संत प्रवर्तक सुकन मुनि ने कहा कि छुट्टी यानी धर्म आराधना का दिन। जब किसी संगीतकार या वाद्य यंत्र, विधि कार्य, संचालक की जरूरत नही होती। एक दिन खुद का समीक्षण करना चाहिए, क्या कर रहे हैं, क्या करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मन के मालिक बनो, मन को अपना मालिक मत बनाओ। सवेरा होते ही पाप क्रियाओं में लग जाता है। 18 तरह की पाप क्रियाएं। प्रतिक्षण किसी न किसी पाप का सेवन होता ही रहता है। कोई समय ऐसा नही गुजरता जब हम एक भी पाप का सेवन नही कर रहे होते। कुछ भी न करते हुए भी तन से क्रिया नही होते हुए भी, वचन से कोई उच्चारण न होते हुए भी, मन ऐसा दुश्मन बन गया है कि हर पल संसार की किसी न किसी प्रवृत्ति में अटका कर, भटका कर, लटकाकर रखता है। सपने दिखाने में कामनाओं का विस्तार करवाने में, इच्छाओं की आग लगाने में मन प्रतिक्षण सहयोग करता है। मन से कनेक्शन कैसे टूटे?
उन्होंने कहा कि बड़ों के साथ विनम्रता, छोटों के साथ वात्सल्य, पड़ोसियों के साथ अपनेपन, बाजार में हाय हैलो का व्यवहार इस सबके मूल में मन ही है। जैन धर्म में संज्ञा का अर्थ संघी है यानी जो मन वाला है। रात को सोते हुए अपने पापों का क्षय तो कर सकते हैं। मिच्छामि दुक्कड़म का भाव आएगा तो शुरुआत ही होगी।
प्रवचन सभा को उप प्रवर्तक अमृतमुनि महाराज, महेश मुनि, अखिलेश मुनि तथा डॉ वरुण मुनि का भी सान्निध्य प्राप्त हुआ।
