कल्पवृक्ष बुक क्लब, उदयपुर में “अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस” पर महिला विशेष पुस्तक सत्र आयोजित*

उदयपुर।  कल्पवृक्ष रीडिंग क्लब, उदयपुर द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में एक विशेष पुस्तक समीक्षा सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें भारतीय साहित्य में नारी के विविध आयामों पर केंद्रित पुस्तकों की समीक्षाएँ प्रस्तुत की गईं। इस अवसर पर रीडिंग क्लब की सदस्यों ने अपने विचारों के माध्यम से नारी की शक्ति, संवेदना और सामाजिक भूमिका पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम की शुरुआत श्रीमती रीना गुप्ता द्वारा प्रस्तुत पुस्तक “एक स्वर, सहस्र प्रतिध्वनियाँ” की समीक्षा से हुई। इस पुस्तक के लेखक साकेत सूर्येश हैं। यह कथा-संग्रह भारतीय संस्कृति, मानवीय मूल्यों और समकालीन जीवन के प्रश्नों को पौराणिक और सामाजिक प्रसंगों से जोड़ते हुए प्रस्तुत करता है। श्रीमती रीना ने अपनी प्रस्तुति में बताया कि पुस्तक की कथाएँ समाज में स्त्री की भूमिका और उसकी अंतर्निहित संवेदनशीलता को प्रभावी ढंग से सामने लाती हैं।

इसके पश्चात् श्रीमती रूचि श्रीमाली ने “संवर्धिनी- महिला विषयक भारतीय दृष्टिकोण” तथा “भारतीय दृष्टि में नारी चिंतन” पुस्तक पर अपनी समीक्षा प्रस्तुत की। नारी भारतीय समाज की सक्रिय, सृजनशील शक्ति के रूप में प्रतिष्ठित है, न कि केवल पीड़िता। यह पुस्तकें वर्तमान समय में भारतीय दृष्टिकोण से नारी के मुद्दों को समझने और उन्हें वैचारिक स्पष्टता प्रदान करती है।

कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति डॉ. अंजली जुयाल द्वारा की गई, जिसमें उन्होंने वाल्मीकि रामायण से “श्रीमदवाल्मीकिय रामायण में नारी शक्ति का विमर्श” पर विचार प्रस्तुत किए। इस प्रस्तुति में उन्होंने वाल्मीकि रामायण में उपस्थित स्त्री पात्रों—जैसे मां सीता, मां गंगा, माता अनुसूया, मंदोदरी, त्रिजटा आदि के माध्यम से नारी के धैर्य, करुणा, बुद्धिमत्ता और नैतिक शक्ति का गहन विश्लेषण किया। उन्होंने यह भी बताया कि रामायण में नारी केवल सहायक पात्र नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक मूल्यों की संवाहक के रूप में प्रतिष्ठित है।

इस सत्र का उद्देश्य पुस्तकों के माध्यम से महिलाओं के योगदान, उनके आदर्श चरित्र और प्रेरणादायक जीवन मूल्यों को समाज तक पहुंचाना रहा।

कार्यक्रम का वातावरण अत्यंत सकारात्मक और प्रेरणादायक रहा, जिसमें सभी प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कल्पवृक्ष रीडिंग क्लब द्वारा ऐसे साहित्यिक और वैचारिक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में पढ़ने की संस्कृति और सकारात्मक चिंतन को बढ़ावा देने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अन्य प्रतिभागियों ने भी अपने विचार साझा किए और इस प्रकार के साहित्यिक आयोजनों को नारी-विमर्श को समझने के लिए अत्यंत उपयोगी बताया। कार्यक्रम में डॉ. लीना दवे, डॉ. किरण एवं श्रीमती यशवंत पालीवाल भी उपस्थित रहे।

By Udaipurviews

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