विद्यापीठ में प्रो. के.एस. गुप्ता स्मृति व्याख्यान माला के तहत विस्तार भाषण का आयोजन
उदयपुर | 27 अप्रैल / इतिहास एवं संस्कृति विभाग जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ उदयपुर द्वारा प्रो. के.एस. गुप्ता की 93वीं जयंती के अवसर पर प्रो. के.एस. गुप्ता स्मृति व्याख्यान माला के तहत विस्तार भाषण का आयोजन रखा गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता कुलपति कर्नल प्रो. शिवसिंह सारंगदेवोत ने प्रो.के.एस गुप्ता के इतिहास विषय के प्रति त्याग व समर्पण को याद कर उनकी स्मृति में उनके व्यक्तित्व एवं इतिहास लेखन पर जोर देते हुए भारतीय राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्ता, उपयोगिता, प्रमुख सिद्धांत, क्षेत्रीय मूल्य, सभ्यता एवं संस्कृति आदि पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हमें यह मिथक तोड़ना होगा कि भारतीय इतिहास का निर्माण यूरोपीय इतिहासकारों ने किया है। हमारे प्राचीन भारतीय इतिहास में ऋग्वेद से लेकर अनेक ग्रंथो की रचना हम भारतीयों ने कर दी थी। आजादी के बाद जब शिक्षा नीति का निर्माण किया गया तब इन सब स्रोतों में प्राचीन ज्ञान परंपरा को गौण कर अलग दिशा में इतिहास को लागू किया गया, जिसके परिणामस्वरुप हमारे पास जो पीढ़ी है वह भारतीय सभ्यता, संस्कृति के अनुरूप नहीं है।
नई भारतीय राष्ट्रीय शिक्षा नीति में इस कमी को अनुभव किया गया तथा भारतीय सभ्यता संस्कृति, परंपराओं से ओत-प्रोत भारतीय ज्ञान परंपरा को आने वाली पीढ़ी में संवाहित करने के लिए शिक्षा नीति, पाठ्यक्रम बनाए जा रहे हैं। प्रो. सारंगदेवोत ने अपने विषय को पूर्णता प्रदान करने के लिए प्राचीन भारतीय इतिहास के अनेक स्रोतों के उदाहरण देते हुए प्राचीन ज्ञान परंपरा, मूल्य, नैतिकता, मनुष्यता, भारतीय दर्शन, विज्ञान, कृषि, चिकित्सा, रसायन विज्ञान, योग आदि से संबंधित हमारी ज्ञान परंपरा को मजबूती के साथ प्रस्तुत किया, साथ ही आज की पीढ़ी में ज्ञान परंपरा की आवश्यकता को कैसे पूर्णता के साथ समाहित की जाए इसके तरीकों व परिणामों पर चर्चा की।
प्रारम्भ में उदयपुर शहर के इतिहासकारों ने प्रो. के. एस. गुप्ता को पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धा सुमन अर्पित किया। विभागाध्यक्ष डॉ. हेमेंद्र चौधरी ने प्रो. के. एस. गुप्ता के व्यक्तित्व पर चर्चा करते हुए सभी अतिथियों का स्वागत किया। विशिष्ट अतिथि छगन बोहरा ने प्रो. गुप्ता को याद करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर उद्बोधन दिया। अधिष्ठाता प्रो. मलय पानेरी ने अपने विचार रखते हुए सभी का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में प्रो. मीना गौड़, प्रो. गिरीशनाथ माथुर, प्रो. राजेंद्र पुरोहित, डॉ. जे.के.ओझा, डॉ. विवेक भटनागर, प्रो. दिग्विजय भटनागर, प्रो. प्रतिभा, प्रो. नीलम कौशिक, डॉ. अनुराग कश्यप, मदन मोहन टांक, जय किशोर चौबे, इंद्रसिंह राणावत, डॉ. विमल शर्मा, डॉ. हरीश जी, डॉ. ममता पूर्बिया, डॉ. मीणा, डॉ. पारस जैन आदि इतिहासकार एवं प्रबुद्धजन उपस्थित थे।
उदयपुर | 27 अप्रैल / इतिहास एवं संस्कृति विभाग जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ उदयपुर द्वारा प्रो. के.एस. गुप्ता की 93वीं जयंती के अवसर पर प्रो. के.एस. गुप्ता स्मृति व्याख्यान माला के तहत विस्तार भाषण का आयोजन रखा गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता कुलपति कर्नल प्रो. शिवसिंह सारंगदेवोत ने प्रो.के.एस गुप्ता के इतिहास विषय के प्रति त्याग व समर्पण को याद कर उनकी स्मृति में उनके व्यक्तित्व एवं इतिहास लेखन पर जोर देते हुए भारतीय राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्ता, उपयोगिता, प्रमुख सिद्धांत, क्षेत्रीय मूल्य, सभ्यता एवं संस्कृति आदि पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हमें यह मिथक तोड़ना होगा कि भारतीय इतिहास का निर्माण यूरोपीय इतिहासकारों ने किया है। हमारे प्राचीन भारतीय इतिहास में ऋग्वेद से लेकर अनेक ग्रंथो की रचना हम भारतीयों ने कर दी थी। आजादी के बाद जब शिक्षा नीति का निर्माण किया गया तब इन सब स्रोतों में प्राचीन ज्ञान परंपरा को गौण कर अलग दिशा में इतिहास को लागू किया गया, जिसके परिणामस्वरुप हमारे पास जो पीढ़ी है वह भारतीय सभ्यता, संस्कृति के अनुरूप नहीं है।
नई भारतीय राष्ट्रीय शिक्षा नीति में इस कमी को अनुभव किया गया तथा भारतीय सभ्यता संस्कृति, परंपराओं से ओत-प्रोत भारतीय ज्ञान परंपरा को आने वाली पीढ़ी में संवाहित करने के लिए शिक्षा नीति, पाठ्यक्रम बनाए जा रहे हैं। प्रो. सारंगदेवोत ने अपने विषय को पूर्णता प्रदान करने के लिए प्राचीन भारतीय इतिहास के अनेक स्रोतों के उदाहरण देते हुए प्राचीन ज्ञान परंपरा, मूल्य, नैतिकता, मनुष्यता, भारतीय दर्शन, विज्ञान, कृषि, चिकित्सा, रसायन विज्ञान, योग आदि से संबंधित हमारी ज्ञान परंपरा को मजबूती के साथ प्रस्तुत किया, साथ ही आज की पीढ़ी में ज्ञान परंपरा की आवश्यकता को कैसे पूर्णता के साथ समाहित की जाए इसके तरीकों व परिणामों पर चर्चा की।
प्रारम्भ में उदयपुर शहर के इतिहासकारों ने प्रो. के. एस. गुप्ता को पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धा सुमन अर्पित किया। विभागाध्यक्ष डॉ. हेमेंद्र चौधरी ने प्रो. के. एस. गुप्ता के व्यक्तित्व पर चर्चा करते हुए सभी अतिथियों का स्वागत किया। विशिष्ट अतिथि छगन बोहरा ने प्रो. गुप्ता को याद करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर उद्बोधन दिया। अधिष्ठाता प्रो. मलय पानेरी ने अपने विचार रखते हुए सभी का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में प्रो. मीना गौड़, प्रो. गिरीशनाथ माथुर, प्रो. राजेंद्र पुरोहित, डॉ. जे.के.ओझा, डॉ. विवेक भटनागर, प्रो. दिग्विजय भटनागर, प्रो. प्रतिभा, प्रो. नीलम कौशिक, डॉ. अनुराग कश्यप, मदन मोहन टांक, जय किशोर चौबे, इंद्रसिंह राणावत, डॉ. विमल शर्मा, डॉ. हरीश जी, डॉ. ममता पूर्बिया, डॉ. मीणा, डॉ. पारस जैन आदि इतिहासकार एवं प्रबुद्धजन उपस्थित थे।
