दो दिवसीय एकात्म मानवदर्शंन का हीरक जयन्ती समारोह का हुआ समापन
सार्वजनिक समारोह का हुआ आयोजन
– समरसता और संतुलित समाज राष्ट्र की प्रगति का आधार है – राज्यपाल बागड़े
– मेवाड़ की धरती त्याग , तपस्या , बलिदान की रही – राज्यपाल हरिभाउ बागड़े
– एकात्म मानवदर्शन राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है – राज्यमंत्री गौतम दक
उदयपुर 05 जून । भारतीय जनसंघ के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा प्रदत्त एकात्म मानवदर्शंन के साठ वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति समारोह समिति जयपुर, भूपाल नोबल्स संस्थान व राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय दीनदयाल उपाध्याय एकात्म मानवदर्शंन हीरक जयंती समारोह का समापन गुरूवार को भूपाल नोबल्स विवि के प्रताप सभागार में हुआ।
समारोह के मुख्य अतिथि राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि जिस प्रकार मानव शरीर के सभी अंगों का समन्वय आवश्यक है, उसी प्रकार समाज के सभी वर्गों का संतुलन राष्ट्र की प्रगति के लिए अनिवार्य है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हमें पाश्चात्य भोगवादी दृष्टिकोण से हटकर भारतीय चिंतन को अपनाना होगा, जो आत्मा, धर्म और कर्तव्य आधारित है।
उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे इस विचारधारा को आत्मसात करें, क्योंकि यही विचार आत्मनिर्भर, संवेदनशील और समरस भारत के निर्माण की नींव रखता है। राज्यपाल ने कार्यक्रम के आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार के विमर्श समय की आवश्यकता हैं और ये राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने अपने उद्बोधन में पंडित जी की राजनैतिक और प्रचारक जीवन यात्रा पर प्रकाश डालते हुए अन्त्योदय उत्थान के लिए उनके विचारों और प्रयासों को बताया। बागड़े ने उपाध्याय जी के हिन्दू राष्ट्र की संकल्पना और उनको साकार में लाने के विचारों को भी बताया। उन्होंने मेवाड़ ने आक्रांताओं के प्रतिकार से जो वीरता और शौर्य दिखाया उसके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
प्रबंध निदेशक मोेहब्बत सिंह राठौड ने बताया कि समारोह से पूर्व हरिभाउ बागडे ने संस्थान परिसर में लगी भूपाल सिंह जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन। एनसीसी केडेट्स द्वारा गार्ड आॅफ आॅनर दिया गया।
आयोजन सचिव डाॅ.युवराज सिंह राठौड ने बताया कि समारोह में अतिथियों द्वारा पंडित दीनदयाल उपाध्याय के 1964 में साक्षी रहे पन्नालाल शर्मा, बंशीलाल गदिया, एडवोकेट खूबीलाल शर्मा का उपरणा, शाॅल एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत करते हुए कुलपति प्रो. सारंगदेवोत ने कहा कि एकात्मक मानवदर्शन केवल एक विचार नहीं, बल्कि भारतीय चिंतन की जीवंत परंपरा है जो जीवन को आत्मा और शरीर के समन्वित रूप में देखती है।यह दर्शन आधुनिक जीवन की चुनौतियों के बीच भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूती से प्रस्तुत करता है। भारत की आत्मा समग्रता में बसती है, न कि केवल अखंडता में यानी भारत विविधता में एकता के विचार का प्रतीक है।यह दर्शन एक ऐसे समाज की कल्पना करता है जहाँ हर व्यक्ति समान अवसर और सम्मान का अधिकारी है, और सामाजिक समरसता स्थापित होती है। उनका कहना था कि एकात्मक मानववाद सिर्फ स्मरणीय विचार नहीं, बल्कि व्यवहार में लाने योग्य जीवनदर्शन है, जो आत्मनिर्भरता और भारतीयता की नींव पर आधारित है।
विशिष्ठ अतिथि राजस्थान सरकार के राज्यमंत्री गौतम दक ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का यह दर्शन भारतीय चिंतन की गहराइयों से निकला ऐसा प्रकाश है जो व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के बीच संतुलन और समरसता की भावना को प्रकट करता है। दर्शन की विशेषता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा, यह जीवन को आत्मा और शरीर के समन्वित रूप में देखने की दृष्टि देता है, जिसमें सांस्कृतिक जड़ें और आधुनिक समस्याओं का समाधान दोनों निहित हैं।
भारत की प्रकृति में धर्म का प्राणतत्त्व समाहित है – कानितकर
विचारक मुकुल कानितकर ने एक कार्यक्रम को दिखाते हुए कहा कि हर राष्ट्र का अपना उद्देश्य, लक्ष्य और स्वभाव होता है। भारत के स्वभाव में प्राणतत्त्व समाहित है, यही कारण है कि यहां धर्म की जीवंतता बनी हुई है। उन्होंने ऑपरेशन सिन्दूर में स्वदेशी अस्त्र-शस्त्रों का उदाहरण देते हुए स्वदेशी की शक्तियों का उत्तर दिया। साथ ही उन्होंने बताया कि भारतीय योग को मिली वैश्विक स्वीकृति से भारत के विश्वगुरु बनने की अवधारणा को बल मिलता है।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति समारोह समिति जयपुर के अध्यक्ष प्रो. मोहन लाल छीपा ने समिति द्वारा किये गये कार्यो की जानकारी एवं दो दिवसीय समारोह का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। काव्य गीत डाॅ. अक्षांश भारद्वाज द्वारा गाया गया ।
आयोजन सचिव डॉ. युवराज सिंह राठौड़ ने बताया कि इस अवसर पर रजिस्ट्रार डॉ. एन.एन. सिंह , प्रमोद सामर, महेश शर्मा, सुखाड़िया विवि की कुलगुरू प्रो सुनीता मिश्रा, प्रो. कन्हैयालाल बेरवाल, बीएन संस्थान के प्रबंध निदेशक मोहब्बत सिंह राठौड़, मंत्री डॉ. महेन्द्र सिंह आगरिया, डॉ. रेणु राठौड़, अनुराग सक्सेना, पूर्व कुलपति प्रो. बीएल चैधरी, प्रो. लोकेश शेखावत, हेमेन्द्र श्रीमाली, पूर्व विधायक धर्मनारायण जोशी, डाॅ. बीएल चैधरी, भंवर सिंह पंवार, भाजपा जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड, कुलदीप सिंह ताल, प्रभारी दीपक शर्मा, राजेन्द्र सिंह, शक्ति सिंह कारोही, प्रो. प्रेम सिंह रावलोत, अक्षांश भारद्वाज, डॉ. अनिल कोठारी, नीरज कुमावत, डॉ. विजय प्रकाश विपलवी सहित शहर गणमान्य नागरिक व अनेक शिक्षाविद, विद्वान उपस्थित रहे।
संचालन डाॅ. अनिता राठौड़ ने किया जबकि आभार मंत्री डाॅ. महेन्द्र सिंह आगरिया ने जताया।
एकात्मक मानवदर्शन भारतीयता और आधुनिकता का समन्वय है – प्रो. सारंगदेवोत
