उदयपुर। सूरजपोल स्थित दादाबाड़ी में साध्वी विपुल प्रभा श्रीजी ने कहा कि मोक्ष की ओर कैसे प्रस्थान करें, किस राह से जाएं ये पता नही है या जान बुझकर अनजान बने हुए हैं। मोक्ष के लिए धर्म करना पड़ेगा। पौषध, सामायिक, उपवास ये सब भाव से करेंगे तो मोक्ष की ओर जाएंगे लेकिन चूंकि सिर्फ करना है इसलिये कर रहे हैं। धर्म एकमात्र ऐसी जगह है जहां बाह्य मन से कोशिश करते हैं बाकी सब जगह सफलता के लिए जी तोड़ मेहनत करते हैं। एक नाही तो दूसरा, नाही तो तीसरी जगह, अन्य तरीकों से कोशिश करते हैं बस धर्म के लिए ही ज्यादा कोशिश नही होती।
आज की दुनिया में स्टेटस बढाने के लिए मान, मर्यादा सबको दांव पर लगा देते हैं। पहले अगर किसी जैन ने बोल दिया तो पत्थर की लकीर था। लोग मान जाते थे कि अगर जैन ने, साहूकार ने बोला है तो सही होगा। अब देखिए कि चीजों की वैल्यू बढ़ गई लेकिन खुद की वैल्यू कम हो गई है। धर्म के अनुसार जीवन जीना था लेकिन धर्म की जगह धन ने ले ली। धन और स्वार्थ के पीछे पागल हो गए। खुद का स्टेटस बढ़ा दिया लेकिन जिन शासन के स्टेटस का ध्यान नही रखा।
साध्वी विरल प्रभा श्रीजी ने कहा कि मेरी एक क्रिया गलत होगी तो जिन शासन का क्या प्रभाव होगा, ये सोचना बंद कर दिया। अब उल्टा होने लग गया। जैन के यहां रात्रि भोजन, आयोजनों में जमीकंद बनने लग गए और अजैन के यहां ये सब होने लग गया। जिन शासन की सेवा में मेरा क्या योगदान है इस पर विचार करने की जरूरत है। हम इतने लालची हो गए हैं कि खुद को ठग रहे हैं। स्टेटस, दिखावे के कारण हमने सब कुछ बदल दिया। साध्वी कृतार्थ प्रभा श्रीजी ने गीत प्रस्तुत किया।
मोक्ष प्राप्ति के लिये धर्म का सहारा लेना होगाःविपुलप्रभाश्री
