प्रतापगढ़ : आपातकाल में जीवनरक्षक बनेंगे छात्र, स्कूल-कॉलेजों में सीपीआर प्रशिक्षण होगा शुरू

प्रतापगढ़। आमजन विशेषकर विद्यार्थियों को आपातकालीन परिस्थितियों में जीवनरक्षक प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने हेतु चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। इसके अंतर्गत जिले के समस्त स्कूलों एवं कॉलेजों में विद्यार्थियों को बुनियादी चिकित्सा कौशल, विशेष रूप से सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस कार्यक्रम की शुरुआत जिला स्तरीय प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण से की गई, जो शुक्रवार को सीएमएचओ सभागार प्रतापगढ़ में आयोजित हुआ।इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिला चिकित्सालय के फिजिशियन डॉ. अंशुल दोषी द्वारा जिले के सभी ब्लॉकों से उपस्थित नर्सिंग ऑफिसर, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) एवं एएनएम को सीपीआर तथा आपातकालीन प्राथमिक उपचार का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान डमी (मॉडल) के माध्यम से वास्तविक परिस्थितियों में सीपीआर देने की तकनीक को विस्तार से समझाया गया।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जीवराज मीणा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बताया कि हृदयाघात, अचानक बेहोशी, सांस रुकने जैसी आपातकालीन स्थितियों में सीपीआर एक अत्यंत प्रभावी जीवनरक्षक प्रक्रिया है। समय पर एवं सही तरीके से सीपीआर देने से कई मरीजों की जान बचाई जा सकती है। सीएमएचओ डाॅ मीणा ने बताया कि ‘गोल्डन ऑवर’ के दौरान रोगी को प्रारंभिक सहायता प्रदान कर अस्पताल तक सुरक्षित पहुंचाना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
डॉ. मीणा ने हृदयाघात जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में वृद्धि देखी गई है। अधिकांश मामलों में आपात स्थिति में मौजूद लोग यह नहीं समझ पाते कि उन्हें तत्काल क्या करना चाहिए। इसी उद्देश्य से सरकार द्वारा यह प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है ताकि आमजन को प्राथमिक चिकित्सा की जानकारी देकर जनहानि को कम किया जा सके।
प्रशिक्षण के दौरान डॉ. अंशुल दोषी ने सीपीआर की संपूर्ण प्रक्रिया को चरणबद्ध रूप से समझाया। उन्होंने बताया कि मायोकार्डियल इंफार्क्शन (एमआई) या कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में मरीज को किसी सुरक्षित और समतल स्थान पर पीठ के बल सीधा लिटाना चाहिए। इसके पश्चात छाती के मध्य भाग पर प्रति मिनट लगभग 100 से 120 कंप्रेशन दिए जाते हैं। इसके साथ ही एंबु बैग के माध्यम से कृत्रिम श्वास दी जाती है। यदि एंबु बैग उपलब्ध न हो तो माउथ-टू-माउथ ब्रीद भी दी जा सकती है।
उन्होंने यह भी बताया कि सीपीआर प्रारंभ करने से पूर्व मरीज की सांस, नाड़ी तथा चेतना की जांच अवश्य करनी चाहिए। साथ ही तत्काल 108 एंबुलेंस या अन्य आपातकालीन सेवाओं को कॉल करना चाहिए। जब तक एंबुलेंस या चिकित्सा सहायता उपलब्ध न हो जाए, तब तक सीपीआर जारी रखने से रोगी की जान बचाने की संभावना बढ़ जाती है।
कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. नीतेश मीणा ने जानकारी दी कि जिला स्तरीय प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण के उपरांत सभी प्रशिक्षक अपने-अपने खंडों में जाकर वहां कार्यरत अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित करेंगे। इसके पश्चात चरणबद्ध तरीके से स्कूलों एवं कॉलेजों में जाकर विद्यार्थियों को सीपीआर, फर्स्ट एड एवं आपातकालीन स्थितियों में किए जाने वाले आवश्यक उपायों की जानकारी दी जाएगी।
कार्यक्रम के दौरान एपिडेमियोलॉजिस्ट सचिन शर्मा द्वारा कार्यक्रम की रूपरेखा, उद्देश्य एवं जिले में इसके प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में जानकारी साझा की गई। उन्होंने बताया कि इस पहल से विद्यार्थियों में आपातकालीनस्थितियों से निपटने का आत्मविश्वास विकसित होगा तथा समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। इस अवसर पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी एवं प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे।

By Udaipurviews

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