उदयपुर, 27 जुलाई। मीडिया का स्वरूप चाहे कोई भी हो, पत्रकारिता श्रद्धा का विषय है, शौक का नहीं।
यह बात रविवार को जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन आॅफ राजस्थान (जार) उदयपुर इकाई की ओर से की गई पहल नवोदित पत्रकार कार्यशाला में विषय विशेषज्ञों ने कही। विषय विशेषज्ञों के रूप में कॉलेज प्राध्यापक व अक्षय किरण पत्रिका के सम्पादक अनिल चतुर्वेदी और जार के प्रदेश कोषाध्यक्ष कौशल मूंदड़ा ने समाचारों के उदाहरण सहित पत्रकारिता के दायरे और जिम्मेदारियों पर विचार रखे।
कार्यशाला में उभर कर आया कि पत्रकारिता में समस्या के समाधान की दिशा पर फोकस किया जाए तो पत्रकारिता पर आक्षेपों का कोई सवाल ही खड़ा नहीं होगा। पत्रकारिता का अर्थ ही जनहित की सेवा है जिसे थैंकलैस जॉब भी कहा गया है। जनहित के इतर स्वरूपों को पत्रकारिता कहना ही बेमानी है।
कार्यशाला में विषय विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि कोई भी समाचार हो, उसमें उस समाचार के विषय से संबंधित जितने भी पक्ष हैं उन सभी का कथन जोड़ा जाना चाहिए। कोई उपलब्ध न हो सके, यह बात दीगर है, लेकिन हम प्रयास ही न करें, यह जिम्मेदारी से हटने वाली बात हो जाती है। क्योंकि जैसे ही हम पक्ष—प्रतिपक्ष दोनों से बात करते हैं तो तस्वीर लगभग साफ हो जाती है और समाचार के प्रस्तुतीकरण पर हमारी निर्णय करने की राह भी प्रशस्त हो जाती है। यह बात सिर्फ प्रिंट पत्रकारिता पर ही लागू नहीं होती, अपितु वीडियो पत्रकारिता में भी यही सिद्धांत सर्वोपरि है।
यहां अमल का कांटा—सत्यनारायण मंदिर मार्ग पर स्थित श्रीनाथ कॉमर्स कॉलेज कोचिंग इंस्टीट्यूट पर आयोजित कार्यशाला में जार के प्रदेश सह संयोजक सुभाष शर्मा, जार जिलाध्यक्ष राकेश शर्मा राजदीप ने भी विभिन्न संगठनात्मक विषयों पर मार्गदर्शन प्रदान किया। इंस्टीट्यूट के निदेशक जगदीश नारायण गुप्ता ने भी पत्रकारिता में जनहित के मुद्दों को ज्यादा से ज्यादा उठाने की बात कही। जार जिला सचिव योवंतराज माहेश्वरी, हरीश नवलखा, सुनील कालरा, दिनेश औदिच्य, मदन चौधरी आदि जार पदाधिकारियों ने उनका उपरणा ओढ़ाकर स्वागत किया व धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यशाला में जितेंद्र माथुर,नवरतन खोखावत, हिमांशु परिहार, उमेश चौहान, घनश्याम जोशी, लक्ष्मण गोरान, राजेश शर्मा, पुनीत भटनागर, सतीश मेघवाल, दीपक माली भी उपस्थित रहे।
