प्रज्ञा की ‘मन की लहरें’ कविता संग्रह का विमोचन

समाज का आईना होती है कविता – आदिति मेहता

उदयपुर, 06 मार्च। युवा कवयित्री डॉ. प्रज्ञा जैन की कविताओं का संग्रह ‘मन की लहरें’ पुस्तक का विमोचन होली के सह अवसर पर सोमवार को किया गया। मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त आईएएस अदिति मेहता, पूर्व प्रशासनिक अधिकारी विनीता बोहरा सहित अतिथियों ने पुस्तक का विमोचन किया।

इस अवसर पर डॉ अदिति मेहता ने कहा कि साहित्य और कविताएं समाज का आईना हैं। उन्होंने मन की लहरें पुस्तक के शीर्षक को विवेचित करते हुए कहा कि व्यक्ति को अपने मन की लहरों को किसे से प्रभावित होकर दबाना नहीं चाहिए। मन की उमंग यदि दब जाती है तो व्यक्ति का आत्मविश्वास प्रभावित हो जाता है। उन्होंने कहा कि यदि हम भाषा को खो देते हैं तो हम अपनी संस्कृति को खो देते हैं।

कार्यक्रम में लेखिका की माता समाजसेवी श्रीमती माया कुम्भट ने बताया कि राजस्थान साहित्य अकादमी के सहयोग से प्रकाशित डॉ. प्रज्ञा के कविता संग्रह में जीवन का अनुभव है। बचपन से लिखी कविताओं का पुस्तक के रूप में सामने आना एक बड़ी उपलब्धि है।

कार्यक्रम का अंतिम सत्र प्रश्नोत्तरी का रहा जिसमें डॉ शकुंतला सरूपरिया ने डॉ प्रज्ञा जैन की कविताओं में छिपे संदेशों को लेकर चर्चा की।

इस दौरान प्रज्ञा ने कुछ कविताएं सुनाईं भी, विशेष रूप से कन्या भ्रूण हत्या को लेकर लिखी गई भावुक कर देने वाली कविता ‘मां, मत करो हस्ताक्षर, मेरी मौत के कागज पर’ सुनाने के दौरान पूरे सदन में गम्भीरता छा गई।

प्रज्ञा ने प्रकृति और पुरुष के परस्पर सम्बन्धों को दर्शाती कविता ‘तुम तो बादल हो बरस के उड़ जाओगे, मैं तो धरती हूं भीग के निखर जाऊंगी’ सुनाकर भी सभी को भावविभोर कर दिया।

इसी तरह, आत्मविश्वास को मजबूत करने की उनकी कविता ‘घिस घिस कर महक जाओगे, तुम तो चंदन हो, चलते चलो, सिर्फ चलते चलो’ का पाठन सुश्री श्रेया कुम्भट ने किया जिसे तालियों का आशीर्वाद मिला।

अम्बामाता स्थित महावीर साधना स्वाध्याय समिति में आयोजित विमोचन कार्यक्रम में सुखाड़िया विश्वविद्यालय पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ कुंजन आचार्य व वरिष्ठ अधिवक्ता रागिनी शर्मा ने पुस्तक की समीक्षा प्रस्तुत की। रागिनी ने कहा कि साहित्य संस्कृति का दर्शन है। उन्होंने परिवार को समाज की धुरी बताते हुए कहा कि हमें अपने से पहले की पांचवीं पीढी की जानकारी नहीं है, इस पर भी विचार करना चाहिए।

जानी मानी कवयित्री डॉ शकुंतला सरूपरिया ने पुस्तक परिचय के साथ लेखिका का परिचय कराते हुए कहा कि डॉ. प्रज्ञा जैन( गोल्ड मेडलिस्ट)  झीलों की नगरी उदयपुर में उन्होंने एमबीबीएस, एमएस की शिक्षा प्राप्त की। स्त्री रोग विशेषज्ञ की तरह उदयपुर में कार्य करते समय, नारी जीवन की चुनौतियों को उन्होंने नजदीक से देखा। विवाहोपरान्त उन्होंने अमेरिका में न्यूयॉर्क में एमडी मेडिसिन की। वे अब केलिफोर्निया में प्रैक्टिस करती हैं। उन्हें वहाँ पर भी काफ़ी कवि गोष्टि में बुलाया जाता है ।

डॉ प्रज्ञा ने पुस्तक की बिक्री से होने वाली आय को महिला समाज सोसायटी उदयपुर के सेवाकार्यों में समर्पित करने की घोषणा की।

आरम्भ में क्षितिज कुम्भट, मीनू कुम्भट, अजय जैन, अशोक जैन, मंजू जैन,
कमल नाहटा ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।

By Udaipurviews

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