उदयपुर, 31 अगस्त। श्री जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक श्रीसंघ के तत्वावधान मालदास स्ट्रीट स्थित आराधना भवन में चातुर्मास कर रहे पंन्यास प्रवर ने शनिवार को धर्मसभा में कहा कि दूसरे सारे पर्व कर्म को नाश करते हैं पर पर्युषण पर्व तो कर्म के मर्म का नाश करता है। जिनशासन में तीन बातें प्रमुख है कर्म, धर्म और पर्व। इन 40 दिनों में धर्म और कर्म समझे और आगे भी समझेंगे पर आज तो पर्व को समझना है। पर्व के तीन आउटपुट है पुण्य वृद्धि, पाप नाश और गुण वृद्धि। पर्युषण पर्व से इन तीनों की प्राप्ति होती है। पर्युषण में 8 दिन करने योग्य 5 कर्तव्य है-अमारि प्रवर्तना, वेल एज्युकेटेड बनो, वेल रिपोर्टर बनो, वेल सपोर्टर बनो, वेल डिवोटेड बनो, साधर्मिक भक्ति करो। हमारी जानकारी संस्कारित होनी चाहिए। ऐसा कोई भी ज्ञान नहीं होना चाहिए जो हमारा या दूसरों का भव बिगाड़े। एक गलत रिपोर्टिंग इतिहास बदल देती है। हम सपोर्ट किसका करें धर्म कार्य का या संसार का यह आपको तय करना है। वहीं अपनी समझ शक्ति, इच्छा शक्ति और निर्णय शक्ति को शासन को समर्पित करो। साथ ही समान धर्म वालों की भक्ति बुद्धि के तराजू में एक तरफ सभी धर्म और दूसरी तरफ साधर्मिक भक्ति रखो तो दोनों पलड़े समान आएंगे।
पर्युषण पर्व तो कर्म के मर्म का नाश करता है : निरागरत्न
