प्रकृति और पक्षी प्रेमी ललित लोहार की गौरैया संरक्षण में  छोटी सी पहल

राजेश वर्मा
उदयपुर। करीब 12 साल पहले प्लास्टिक की बोतल से एक घोंसला लगाकर शहर के युवा ललित लौहार ने एक छोटी सी पहल की। अगले ही दिन उसके अंदर गौरैया को देखकर शुरुआत अब गौरैया को बेठा देखकर इतनी खुशी हुई कि अब तक ललित ने करीब 80 से भी अधिक घोंसले बनाकर लगा चुके हैं। इनके लिए ललित ने अपने घर के अंदर वह बाहर चारों तरफ पेड़ पौधे लगाकर हरियाली का वातावरण बना रखा है ताकि गौरैया अन्य पक्षी  इन पर अधिक से अधिक रह सके इसके साथ उनके लिए नित्य अपने दिनचर्या में दाना पानी की व्यवस्था नियमित रूप से करते है।

बजरंग दल विभाग संयोजक ललित लौहार ने बताया कि खुशी की बात भी यह है कि अधिकतर घोसलों  में  गौरैया ने अंडे दे रखे कुछ में बच्चे भी तैयार हो चुके हैं। गौरैया  के साथ-सा बुलबुल मैंना ने भी बच्चे दे रखे हैं। अभी कुछ दिन पूर्व एक बच्चे की मां मर गई इसके बाद उन्होंने स्वयं को छोटे से बच्चे को रोज चम्मच से उसे दान देखकर उसे बड़ा किया यह देखकर उन्हें लगता है कि उनका घर भी छोटा चिड़ियाघर से कम नहीं हैं। उन्होंने इनके लिए लकड़ी के छोटे-छोटे झूले, सीढ़ियां  भी बनाकर लगाई हुई हैं जिनमें ये बैठ कर  अठखेलियां करते हुए दिखाई देखती हैं। गौरैया के बच्चे उनके परिवार से इतने परिचित हो गए हैं कि उनका 6 साल का पुत्र वैदिक भी उनको हाथ पर लेकर उनके साथ खेलता है। वह भी आसानी से हाथों में खेलते रहते है। उन्होंने घर की वेस्टेज पुराने प्लास्टिक के डिब्बे लोहे के पुरानी लकड़ियों के ओर मिठाई के डब्बे  के घोंसले बनाकर अपने घर पर लगाये है। आस पड़ोस के लोग हमारे यहां गौरैया  को देखने के लिए आते हैं। इतनी गोरैया को देखकर उनके मकान का नाम भी गौरैया निवास रखने के लिए कहते हैं।

ललित का कहना है कि रोज सुबह  सूर्योदय होने से पूर्व गौरैया की  चऱर्चराहट से सारे घर का वातावरण आनंदित हो जाता है यह क्रम पिछले 12 सालों से लगातार बढ़ता जा रहा है। हर साल में  घोसले की संख्या बढ़ती है। अब लगभग 80 से भी ज्यादा घोंसले है। इन्हें देखकर एक सुकून सा महसूस होता है। उनकी दिनचर्या में सवेरे गौरैया को दाना  पानी  की व्यवस्था का कार्य निरंतर रहता है। वे और उनका परिवार  अपने माध्यम से अनेकों लोगों को गोरिया संरक्षण के लिए प्रेरित कर रहे है। इससे आनंद की अनुभूति होती है। गोरिया संरक्षण के लिए पिछले वर्ष भी ललित लौहार संभागीय आयुक्त के हाथों सम्मानित हो चुके हैं। ललित कहते हैं लोग अपने घरों पर पुराने प्लास्टिक के डिब्बे से पक्षियों के लिए घर बनाए ताकि हम पक्षियों के सरक्षण का बीड़ा उठा कर अपने घर का माहौल जीवंत बनाए रखें।

By Udaipurviews

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