उदयपुर। सेक्टर 4 श्री संघ में विराजित श्रमण संघीय जैन दिवाकरिया महासाध्वी डॉ श्री संयमलता, साध्वी डॉ श्री अमितप्रज्ञा, साध्वी श्री कमलप्रज्ञा, साध्वीश्री सौरभप्रज्ञा आदि ठाणा 4 के सानिध्य में आयोजित धर्म सभा को संबोधित करते हुए महासती संयमलता ने कहा कि मनुष्य जन्म की सार्थकता शाश्वत सुख की प्राप्ति में है। अनंत सुख सबकी आत्मा में रहा हुआ है। आत्मा में रहे हुए गुणों को जितना विकसित करेंगे उतना हमें रियल सुख का एहसास होगा। सुख पाने की चाह में प्रायः लोग नए-नए पापों में प्रवेश कर लेते हैं। यह मनुष्य की सबसे बड़ी भूल है, इस भूल को सुधारने के लिए हमें पाप भीरू बनना होगा। महासती अमितप्रज्ञा ने कहा माया करोगे तो बिखर जाओगे और मौन रहोगे तो निखर जाओगे। इंसान से बात करने के लिए फोन चाहिए और ईश्वर से बात करने के लिए मौन चाहिए। मौन रहने से घर, परिवार, समाज में सुख शांति बनी रहती है। महिला शिविर का आयोजन हुआ जिसमें 200 से अधिक महिलाओं ने भाग लिया।
मनुष्य जन्म की सार्थकता शाश्वत सुख की प्राप्ति में -साध्वी संयमलता
