अपने लिए चाहते हैं, वह किसी अन्य को प्राप्त हो तो उसे देखकर ईर्ष्या करने की बजाय खुश हो तो समझ लो आपको भी व़ह वस्तु मिलने वालीःज्ञानचंद्र महाराज

उदयपुर। न्यू भूपालपुरा स्थित अरिहंत भवन में विराजमान आचार्य प्रवर ज्ञानचंद्र महाराज ने आज  धर्मसभा में बोलते हुए कहा कि मन को शांत रखना सीखें। सोएं हुए बालक का शांत चेहरा मन को ऐसा मोह लेता है कि एक बार उसे छूने का मन करता है। क्योंकि बच्चे का मन निर्विकार है। धीमी आवाज में शांत बहने वाली नारी, मन को इतना आकर्षित करती है, सभी जिम्मेवारियों को भूलकर कुछ देर वहीं बैठ जाने का मन होता है। एकांत वन प्रान्तर का शांत वातावरण मन को इस तरह आकर्षित कर देता है, व्यक्ति उसी में खो जाना चाहता है।
उन्होंने कहा कि यह शांत वातावरण कैसे हासिल किया जा सकता? इसका जवाब यह है कि गली में भटकने वाले हर कुत्ते को समझदार व्यक्ति घर में तो क्या गली में नहीं रहने देना चाहता। वैसे ही समझदार आदमी को चाहिए कि आस पड़ोस, समाज, देश में घटने वाली घटनाओं को मन में स्थान देने की गलती ना करें। मन को खाली रखें, जिससे वो शांत रहेगा। वो मन ऐसा सकून देगा, जो आपको कहीं नहीं मिल सकेगा।
आचार्य श्री ने कहा कि कैसी भी परिस्थिति हो, मन को खाली और शांत रखा जाएं,क्योंकि बीता आज का समय वापस नहीं आएगा। अतः हर रोज जेब भरी रखी जाए। कुछ न कुछ अच्छा काम करते जाइए। आप जो अपने लिए चाहते हैं, वह किसी अन्य को प्राप्त हो रहा है तो उसे देखकर ईर्ष्या करने की बजाय खुश हो जाएं तो समझ लो आपको भी व़ वस्तु मिलने वाली है। अगर आपका मन, किसी की निंदा में रस लेता है, किसी की बुराई से खुश होता है तो समझ लीजिए आपके साथ में भी कुछ न कुछ बुरा घटने वाला है। आदर्श त्यागी सुदर्शन मुनि महाराज के 20 की तपस्या, एक बहिन के आठ का पारणा हुआ, एक भाई के चार का तप, एकाशना आयंबिल निरंतर चल रहे हैं। आज की गौतम प्रसादी सुश्रावक मोतीलाल,प्रदीप, विनोद,दिलीप,चंडालिया की तरफ से रही।

By Udaipurviews

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