कैसे होगा इलाज़ जब अस्पताल खुद वेंटिलेटर पर, नेशनल  हाईवे का सबसे बड़ा अस्पताल एक डॉक्टर के भरोसे

 10 सालों से नही बदले अस्पताल के हालात 
 लोगों ने शासन से लेकर प्रशासन तक लगाई गुहार 

डूंगरपुर, 20 जून (ब्यूरो) ज़िले के एनएच 48 का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिछीवाड़ा डॉक्टरों की कमी को झेल रहा है। यह अस्पताल सिर्फ़ एक डॉक्टर के भरोसे चल रहा हैं। नेशनल हाईवे 48 होने से यहां पर रोजाना सड़क हादसे होते रहते है। मगर समय पर इलाज नही मिलने से कई बार घायलों की मौत हो जाती है। पिछले 10 सालो से अस्पताल डॉक्टरों की कमी झेल रहा है। कई बार स्थानीय लोगों ने शासन से लेकर प्रशासन तक गुहार लगाई है। मगर आज दिन तक अस्पताल के हालात ऐसे ही है जैसे दस साल पहले हुआ करते थे। एनएच 48 का बिछीवाड़ा सीएचसी सबसे बड़ा अस्पताल है प्रतिदिन यहां पर ओपीडी में 150 के करीब मरीज आते है। वहीं, ओपीडी 15 से 20 मरीज आते है। गंभीर हालात में भर्ती होने वाले मरीजों सीधा रैफर कर दिया जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि, विधायक से मुख्यमत्री और प्रधानमंत्री तक को डॉक्टरों की कमी से अगवत करवा चूके है। मगर हर बार सिर्फ़ आश्वासन मिलता है।

लोगों के पास झोलाझाप एकमात्र सहारा –सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिछीवाड़ा पर 5 डॉक्टर के पद स्वीकृत पद है। जिसमें दो मेडीकल ऑफिसर, एक स्त्री रोग विशेषज्ञ, एक सर्जन और एक एनेस्थीसिया डॉक्टर के पद स्वीकृत है।  लेकिन, अस्पताल में एक मात्र डॉक्टर के भरोसे चल रहा है। वह डॉक्टर भी संविदा पर लगाए है। डॉक्टरों की कमी के चलते लोगों को सही से इलाज नही मिल पाता है। ऐसे में लोगों को मोटा पैसा खर्च कर निजी अस्पताल में जाना पड़ता है। वहीं, दूसरी ओर लोगों को डॉक्टरों की कमी के चलते झोलाझाप डॉक्टर के पास जाना पड़ता है। जिसे उनकी जान को भी खतरा बना रहता है।

अस्पताल की पार्किंग पर  अतिक्रमण-सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बीच कस्बे में बना हुआ। अस्पताल के बाहर लोगों ने अतिक्रमण कर रखा है। ऐसे में अस्पताल पार्किंग की जगह नही लोगों और डॉक्टरों के अस्पताल से दूर वाहन खड़ा करना पड़ता है। वहीं, एंबुलेंस जब मरीज को लेकर आती है। जब अस्पताल के अंदर एंबुलेंस ले जाने 10 से 15 मिनट का समय लग जाता है। क्योंकि बाहर वाहनों का जमावड़ा रहता है। इसका कारण अस्पताल की पार्किंग अतिक्रमण हो रखा है। अतिक्रमण को लेकर जिमेदारों ने कोई सख्त कदम नहीं उठाए इसलिए भू माफियाओं के हौसले बढ़ते जा रहे है।

वर्जन 1 – पिछ्ले 10 सालों से अस्पताल में डॉक्टरों की कमी है। कई बार जनप्रतिनिधि और  प्रशासन को अगवत करवाया है। लेकिन किसी इसका समाधान नहीं किया। अस्पताल के बाहर के अतिक्रमण हो चुका है। इसको लेकर भी कई बार आवाज़ उठाई। लेकिन इस पर कोई कारवाई नहीं की गई। -नारायण लाल मोडिया, सामाजिक कार्यकर्ता 

वर्जन 2 – एनएच 48 होने के कारण दिल्ली से मुंबई के वाहन यहां से गुजरते है। रोजाना दो से तीन सड़क हादसे होते है। गंभीर भर्ती मरीजों यहां भर्ती किया जाता है। लेकिन उन्हें समय इलाज नही मिलता है। जिसे उनकी मौत हो जाती है। यहां के लोगों गरीब है उन्हें अस्पताल में डॉक्टरों नहीं होने की वजह से निजी अस्पताल मोटा पैसा खर्च करना पड़ता है। कई बार लोगों जेवरात, जमीन गिरवी रखकर इलाज करवाते है। -बापूराम बरांडा, अखिल भारतीय किसानसभा, जिला अध्यक्ष 

वर्जन 3 – डॉक्टरों की कमी को लेकर उच्च अधिकारियों को अगवत करवाया है। डॉक्टरों के पद भरने के लिए प्रयास किया जा रहा है। जल्द इसको लेकर कोई ना कोई समाधान निकाला जाएगा।- डॉ नितेश डिंडोर, बीसीएमएचओ, बिछीवाड़ा 

By Udaipurviews

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