आचार्यश्री का चातुर्मास प्रवेश आज ओरबिट रिसोर्ट में
उदयपुर। श्री अरिहंतमार्गी जैन महासंघ शाखा उदयपुर द्वारा आयोजित चातुर्मास से पहले आचार्य ज्ञानचंद्र महाराज ने अरिहंत भवन लवली स्टेट में आयोजित धर्मसभा में कहा कि शब्द भी एक भोजन है, परोसने से पहले चख लीजिए,अगर आपको अच्छा ना लगे तो दूसरों को मत परोसिए।
उन्हांनें कहा कि जो आपको अच्छा लगेगा, वही दूसरों को भी लगेगा। एक जुबान ही ऐसी है जो आपको दूसरों से जोड़ती है या फिर तोड़ती है। अतः जुबान से संभाल कर शब्द निकालिये। समाज एवं परिवार में अधिकतम झगड़े बोलने से होते हैं। अगर प्रेम एवं सम्मानजनक शब्दों में बोला जाए तो आप सभी के प्रिय पात्र तो बनते ही हैं, इसी के साथ अधिकतम कलह भी समाप्त हो जाते हैं। वैसे नहीं बोलने में कई फायदे हैं, पर बोलना पड़े तो शब्दों को चखकर बोलिए।
आजकल बीमारी भी हेरेडिटी से आती है तो संस्कार भी हेरेडिटी से आते हैं। किंतु 84 लाख योनियों में इंसान ही ऐसा प्राणी है जो अपने वंशानुगत या भव भवांतर से आ रहे कुसंस्कारों, कुकर्मों को बदल सकता है।
उन्होंने कहा कि श्री हरिकेशी अनगार दलित थे, अर्जुन अनगार माली थे, रोहिणेय अनगार चोर थे, ऐसे जाति के लोग भी संत संगति पाकर एकदम बदल गए। सिद्धि तक प्राप्त कर ली। एक बुजुर्ग श्राविका ने अपने अनुभव से महान आचार्य को सन्मार्ग पर आगे बढ़ा दिया। विद्वान होना अलग बात है पर विद्वत्ता पर अहंकार, धन पर अहंकार, सुंदरता पर अहंकार दुखदायी है।
हुक्मीचंद खींवसरा ने मद्रास में अगला चातुर्मास करने की विनती की। राकेश पीपाड़ा ने भक्ति अभिव्यक्ति दी। आशा चंडालिया, ललिता रांका ने भक्ति गीत प्रस्तुत किया। यह धर्म स्थानक सुश्रावक बलवंत सिंह, विजय कोठारी की बड़ी देन है।
आचार्यश्री का चातुर्मास प्रवेश आज- आचार्य ज्ञानचन्द्र महाराज का 10 जुलाई को चातुर्मासिक प्रवेश अरिहंत भवन 100 फीट रोड, ऑर्बिट रिसोर्ट के सामने अरिहंत भवन में होगा।
