उदयपुर, 16 अगस्त। श्री जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक श्रीसंघ के तत्वावधान में मालदास स्ट्रीट स्थित आराधना भवन में चातुर्मास कर रहे पंन्यास प्रवर निरागरत्न जी म.सा. ने शुक्रवार को धर्मसभा में कहा कि मानव भव की प्राप्ति के पीछे का कारण पुण्य की बैंकिंग है। जिनवाणी के श्रवण के पीछे पुरूषार्थ, प्रभु वचनों पर श्रद्धा के पीछे जनप्रेम, संयम में आचरण के पीछ पराक्रम है। इन सबकी प्राप्ति के उपाय को बताते हुए कहा कि आपको मिला हुआ मानव भव लॉटरी में मिला है। लॉटरी कितनी बार लगती है? एक-दो बार तो आपको मिला हुआ दुर्लभ ये जन्म बार-बार नहीं मिलेगा। आपकी इच्छा रहती है कि इनवेस्ट किया है तो रिटर्न मिलना चाहिए वैसे ही पुण्य से पुण्य बढ़ना चाहिए। कर्म सत्ता ने स्वस्थ शरीर, सक्षम इन्द्रियां, सत्ता, शक्ति आदि कई सारी अच्छी-अच्छी सामग्री दी है मगर आप उसका सदुपयोग नहीं करोगे तो आगे भव में वापस ये सब सामग्री कहां से मिलेगी? हमें घर में खाना कितना बनाना चाहिए? शास्त्रों में लिखा है कि आया हुआ अतिथि, मेहमान खाली न जाए उतना। दान रूचि, मध्यम गुण, अनत्य कषाय ये तीन गुण आपको अगले भव में मानव जन्म की सीट रिजर्व करवा सकते हैं।
पुण्य से पुण्य बढ़ना चाहिए : निरागरत्न
