उदयपुर। श्री अरिहंतमार्गी जैन महासंघ शाखा उदयपुर के तत्वावधान में आचार्य ज्ञानचन्द्र महाराज का आज ओरबिट रिसोर्ट स्थित अरिहंत भवन में आयोजित धर्मसभा में आचार्य ज्ञानचंद्र महाराज ने कहा कि अंधेरे में छाया साथ नहीं देती, बुढ़ापे में किया साथ नहीं देती, जिसके लिए जिंदगी लगा दी दांव पर अंत समय में वो माया भी साथ नहीं देती।“
उन्होंने कहा कि आज दुनिया में तो घरवाले और घरवाली भी साथ नहीं देती। पहले के जमाने में घरवाली से घर चल जाता था। आज तो बंटाधार है। ना बच्चें मां-बाप को पूछते, ना मां-बाप का उनकी ओर ध्यान है। यह पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव हमारें जैन समाज में आ गया है। आज तो मां-बाप के भी गर्लफ्रेंड और बॉयफ्रेंड है, तो बच्चों को वो क्या समझाएंगे। आचार्य ने कहा जब खाली अंधेरा हो, थोड़ी रोशनी हो तो भी चलेगा। थोड़ा सुख हो तो भी चलेगा, वो भी जिंदगी चला देगी।
एक भाई को हमनें समझाया, महाराज बन जाओ। नहीं माना, कल पता चला उसे कैंसर हो गया।
जिंदगी का कहां भरोसा है, जिस काया को लेकर चल रहे हैं ना उसका भरोसा है, ना माया का भरोसा है, फिर क्यों उसके पीछे पड़े हो।
पक्षी भी अपने बच्चों को कितना पालते हैं। किंतु बुढ़ापे में क्या उनको उनका बच्चा दाना लाकर देते हैं। फिर आप क्यों आस लगा कर बैठे हो कि बच्चे यह करेंगे, वो करेंगे। फिर नहीं संभालते हैं तो आप परेशान हो जाते हैं। उसके बाद ’तुम तुम्हारे हम हमारे“ हो जाओ। बच्चों को लेकर दुखी क्यों होते हो। पक्षी की आदत अपनाओ। आप सुखी रहोगे।
आप किसी के भरोसे नहीं रहोगे तो आपका शरीर साथ देगा। ये सहारे छोड़ दीजिए। सहारा उसका लो, जो निपुण बुद्धि वाला हो, वो होते हैं सुगुरु। आपको पार लगा देंगे। सुगुरु द्वारा सुनी गई वाणी आपका साथ निभाएंगे।
अरिहंतमार्गी संघ के प्रमुख कार्यकर्ता विजय कोठारी ने बताया कि जब से आचार्य भगवन का उदयपुर में पदार्पण हुआ है, तब से तेले तप का अनुष्ठान जारी है। आज दिल्ली, मुंबई, बीकानेर, जलगांव आदि स्थानों से श्रद्धालुओं ने आकर गुरु दर्शन का लाभ लिया।
जिसके लिए जिंदगी लगा दी दांव पर, अंत समय में वो माया भी साथ नहीं देतीःआचार्य ज्ञानचन्द्र
