यूरोप के प्रिंस ने लेमन टी के साथ छेड़ी तान, गाया वो महाराणा प्रताप कठे…

उदयपुर। राजस्थानी गीतों को अपनी आवाज देकर इन दिनों सोश्यल मीडिया पर वायरल हो रहे यूरोप के प्रिंस मंगलवार को उदयपुर आए। उन्होंने उदयपुर की खूबसूरती को निहारने से पहले उदयपुर की फेमस चाय का स्वाद चखा। इसके लिए सहेलियों की बाड़ी स्थित पंडित जी की लेमन टी पर राजस्थान के मशहूर कॉमेडियन आशु देवासी के साथ पहुंचे।
यहां पर पंडित जी लेमन टी के संचालक प्रेमपुरी गोस्वामी ने उनका आत्मीय भाव से स्वागत किया। गुलाब की माला पहनाकर उनका अभिनंदन किया। इस दौरान बड़ी तादाद में लोग एकत्रित हो गए। प्रेमपुरी गोस्वामी ने बताया कि रात को सोशल मीडिया पर लाइव के दौरान बातचीत में उन्होंने चाय के लिए निमंत्रण भेजा। जिसको आशु और प्रिंस की जोड़ी ने स्वीकारते हुए तुरंत जवाब दिया। जवाब मिलने के बाद करीब आधे घंटे में प्रिंस सहेलियों की बाड़ी पहुंचे और चाय का स्वाद लेकर उदयपुर की तारीफ में बातें कही। प्रिंस ने इस दौरान प्रशंसकों की फरमाइश पर खोले खेले खेतलो महाकाली रे…, हरियाला बन्ना ओ…, वो महाराणा प्रताप कठे जैसे राजस्थानी और मेवाड़ी भजन सुनाकर समा बांध दिया। प्रिंस ने कहा कि पूरे राजस्थान में घुमने के बाद एक उदयपुर में ही सैर करने की ख्वाईश थी जो आज पूरी हुई।
सोशल मीडिया पर लाखों फेन
प्रिंस मूलतः यूरोप के रहने वाले है। दो साल से आशु देवासी से सोशल मीडिया से जुड़े थे। इस दौरान कॉमेडियन आशु उनको राजस्थानी भजनों के लिंक भेजा करते थे। 2 साल के अभ्यास के बाद उन्होंने राजस्थानी भजन गाने शुरू किए। प्रिंस पिछले एक महीने से राजस्थान की यात्रा पर है। 11 मार्च को हवाई यात्रा कर अपने देश लौट जाएंगे। आशु बताते है कि प्रिंस की राजस्थानी भाषा सिखने की ललक बड़ी गजब की है। वो दिनरात इसकी की प्रेक्टिस करते है। वो बताते है कि प्रिंस जब आए थे तब करीब 10 हजार फॉलोवर्स हुआ करते थे और आज उनके सोश्यल मीडिया अकाउंट पर लाखों फॉलोवर्स है। हाल ही में उनका खोले खेले खेतलो महाकाली रे…,भजन काफी वायरल हो रहा है।

राजस्थान फसल सुरक्षा मिशन
अब लघु कृषक भी तारबंदी योजना का लाभ ले सकेंगे-पंड्या

उदयपुर, 1 मार्च। राजस्थान फसल सुरक्षा मिशन के अंतर्गत अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों के किसानों को अब न्यूनतम 0.5 हेक्टर (ढाई बीघा के लगभग) भूमि होने पर भी खेतों पर कांटेदार, चैन लिंक तारबंदी करने पर सरकार द्वारा देय अनुदान मिल सकेगा। यह बात राजस्थान अनुसूचित जनजाति परामर्श दात्री परिषद के सदस्य लक्ष्मीनारायण पंड्या ने कही।
पंड्या ने मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि अनुसूचित जनजाति क्षेत्र के किसानों के पास छोटी-छोटी कृषि जोत की भूमि होने के कारण पूर्व में निर्धारित 1.5 हेक्टर यानी लगभग न्यूनतम 7 बीघा भूमि की अनिवार्यता के कारण छोटा एकल किसान इस योजना का लाभ नहीं ले पा रहा था जो अब नए नियम से लाभान्वित हो सकेगा। पंड्या ने बताया कि तारबंदी कार्यक्रम में सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से 10 या इससे अधिक कृषकों के समूह में न्यूनतम 5 हेक्टर भूमि में तारबंदी किए जाने पर पूर्व में निर्धारित अनुदान राशि 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 70 प्रतिशत की गई है। इस नए संशोधन से उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, चितौड़गढ़, राजसमंद, सिरोही, तथा पाली जिलों के अनुसूचित जनजाति क्षेत्र में आने वाले छोटे किसानों को भी लाभ मिल सकेगा ।

By Udaipurviews

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