-पर्यावरणविद् संदीप सोनी ने दिया प्रेरक व्याख्यान,कहा – प्रकृति संरक्षण के लिए बुनियादी कारकों की मजबूती जरूरी,
-पर्यावरण रक्षा एवं विकास के लिए अनुकरणीय आचरण अपनाएं – संत श्री रामप्रकाश रामस्नेही महाराज
बांसवाड़ा, 19 दिसम्बर/जापानी वन विकास की वैश्विक स्तर पर मशहूर ‘मियावाकी फोरेस्ट डवलपमेंट तकनीक’ के विशेषज्ञ एवं पर्यावरणविद् श्री संदीप सोनी ने परम्परागत वनों के संरक्षण एवं संवर्धन को वर्तमान समय की सर्वोच्च प्राथमिकता निरूपित करते हुए इसके लिए जरूरी बुनियादी कारकों पर विशेष फोकस करने का आह्वान किया है और कहा है कि धरातलीय मजबूती से पर्यावरण संरक्षण प्रभावी स्वरूप में मुखर होने लगता है। पर्यावरणविद् संदीप सोनी ने श्री पीताम्बरा आश्रम में नटवरानन्दी वेलफेयर फाउण्डेशन एवं गायत्री मण्डल बांसवाड़ा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पर्यावरण चेतना संगोष्ठी में यह आह्वान किया और पर्यावरण संरक्षण, संवर्धन एवं जागरुकता से संबंधित महत्त्वपूर्ण सूत्रों की जानकारी देते हुए इन्हें अपनाने पर बल दिया। संगोष्ठी की अध्यक्षता गायत्री मण्डल के संरक्षक एवं श्री बड़ा रामद्वारा के संत श्री रामप्रकाश रामस्नेही जी महाराज ने की और हनुमान श्रीविग्रह की पूजा-अर्चना कर संगोष्ठी का शुभारंभ किया।
संगोष्ठी में मुख्य रूप से बांसवाड़ा जिले में जल संरक्षण और प्लास्टिक रीयूज, पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति बहुआयामी जागरूकता संचार के विभिन्न आयामों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया तथा आगामी समय में तकनीकि दक्षता के साथ पौधारोपण, जल संरक्षण एवं पर्यावरणीय मानकों पर सामूहिक प्रयास का निर्णय लिया गया।
प्रकृति पूजा को आचरण में लाएं-अध्यक्षीय उद्बोधन में गायत्री मण्डल के संरक्षक एवं श्री बड़ा रामद्वारा के संत श्री रामप्रकाश रामस्नेही जी महाराज ने पर्यावरण चेतना जगाने और इस दिशा में प्रायोगिक कर्म में जुटने का आह्वान करते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के मितव्ययतापूर्ण सदुपयोग, प्राकृतिक आपदाओं से बचाव, प्रकृति से मौलिक नैसर्गिक आनन्द की प्राप्ति, पौधारोपण आदि कार्यों के लिए इन सभी रचनात्मक कारकों को आचरण में लाते हुए स्वयं से शुरूआत करने की आवश्यकता है।
छोटे प्रयासों से लाएं बड़ा परिवर्तन-पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन के गूढ एवं कारगर सूत्रों पर चर्चा करते हुए अपने व्याख्यान में संदीप सोनी ने छोटे-छोटे प्रयासों से बड़ा परिवर्तन लाने पर बल देते हुए जल संरक्षण, प्लास्टिक पर निर्भरता कम करने, जापानी वैज्ञानिक डॉ. अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित वनरोपण की विधि अपनाने, प्राकृतिकता को सर्वोपरि रखकर प्रकृति का मौलिक स्वरूप दर्शाने, स्थानीय प्रजातियों का अधिक से अधिक उपयोग करने, वन विकास, पल्लवन और सुरक्षा से पर्यावरण प्रबन्धन को सशक्त बनाने आदि विषयों पर अनुभवगम्य अहम् सुझाव दिए और इनके व्यवहारिक पालन का आह्वान किया।
फाउण्डेशन द्वारा स्वागत-इस अवसर पर श्री बड़ा रामद्वारा के संत श्री रामप्रकाश रामस्नेही जी महाराज एवं मुख्य वक्ता संदीप सोनी का स्वागत नटवरानन्दी वेलफेयर फाउण्डेशन के संरक्षक राजेन्द्रप्रसाद द्विवेदी, अध्यक्ष महेन्द्र त्रिवेदी, सचिव रजनीश गुप्ता ने किया। इस्कॉन की प्रतिनिधि साधिका श्रीमती रचना अरुण व्यास ने संत श्री रामप्रकाश जी महाराज का उपरणा पहरणा कर स्वागत किया एवं श्रीमद्भगवद्गीता की पुस्तक भेंट की।
सोनी का अभिनन्दन-पर्यावरणीय गतिविधियों में उल्लेखनीय कार्यों एवं लोक जागरण में उत्कृष्ट भागीदारी के लिए मुख्य वक्ता संदीप सोनी का गायत्री मण्डल की ओर से उपरणा पहनाकर अभिनन्दन मण्डल के उपाध्यक्ष अनिमेष पुरोहित, कोषाध्यक्ष अनन्त जोशी, कार्यकारिणी सदस्य कमलकान्त भट्ट एवं अरुण व्यास, श्री पीताम्बरा परिषद के सह संयोजक पं. मधुसूदन व्यास एवं श्री पीताम्बरा आश्रम प्रबन्धक चन्द्रेश व्यास ने किया।
संगोष्ठी में गायत्री मण्डल के संरक्षक पं. नरहरिकान्त आर. भट्ट, पं. महेन्द्र पाठक, अनिल नरहरि एच. भट्ट, अनिल पण्ड्या, ललित आचार्य, पंकज नारायण वैष्णव, फाउण्डेशन के प्रतिनिधियों डॉ. अश्विन पाटीदार, सौरभ रावल, कालूराम राठौड़ एवं मनीष शर्मा आदि ने विचार व्यक्त किए। संगोष्ठी का संचालन सौरभ रावल तथा आभार प्रदर्शन महेन्द्र त्रिवेदी एवं अनन्त जोशी ने किया।
