संपर्क पोर्टल पर दर्ज लंबित मामलों का निर्धारित समय सीमा में हो प्रभावी निस्तारण- डॉ गोयल

भीलवाड़ा, 27 फरवरी। जिला कलक्टर आशीष मोदी के निर्देशानुसार अतिरिक्त जिला कलक्टर (प्रशासन) राजेश गोयल की अध्यक्षता में सोमवार को विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों की उपस्थिति में साप्ताहिक समीक्षा बैठक का आयोजन कलेक्ट्रेट सभागार में किया गया।
बैठक में अतिरिक्त जिला कलक्टर ने विभिन्न विभागों की योजनाओं, कार्यक्रमों व गतिविधियों से जुड़ी प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

गोयल ने बैठक में फ्लैगशिप योजनाओं में जिले की रैंकिंग की समीक्षा की।
अतिरिक्त जिला कलक्टर राजेश गोयल ने राजस्थान सम्पर्क पोर्टल पर लंबित प्रकरणों के संबंध में विभागवार लंबित प्रकरणों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राजस्थान सम्पर्क पोर्टल पर कोई भी मामला 6 माह से अधिक लंबित ना रहें। साथ ही सीएमओ, पीएमओ, एम-सजग पोर्टल, लाइंस पोर्टल आदि पर लंबित प्रकरणों की नियमित समीक्षा करने को भी कहा।
बैठक में अतिरिक्त जिला कलक्टर (शहर) ब्रह्मालाल जाट ने जिले के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की बजट घोषणाओं के शामिल बिन्दुओं के बारे में जानकारी दी तथा अधिकारियों को भूमि चिन्हीकरण, संबंधित विभाग को सामंजस्य स्थापित कर प्रगति रिपोर्ट भिजवाने के लिए निर्देशित किया।
बैठक में उपखंड अधिकारी भीलवाडा, नगर विकास न्यास सचिव श्री अजय आर्य, नगर परिषद आयुक्त श्रीमती दुर्गा कुमारी, सीएमएचओ डॉ मुश्ताक खान, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक सत्यपाल जांगिड़ सहित अन्य जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे।

कृषि रसायनों का उचित प्रयोग करें-डॉ. यादव
भीलवाडा 27 फरवरी। अनुसंधान निदेशालय, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर द्वारा प्रायोजित अनुसूचित जाति उपयोजनान्तर्गत कृषि रसायनों की गणना एवं स्प्रै पर प्रशिक्षण कृषि विज्ञान केन्द्र अरणिया घोड़ा शाहपुरा के गोदित गाँव ढ़िकोला में आयोजित किया गया।
केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. सी.एम. यादव ने बताया कि भारत की बहुसंख्यक आबादी के लिए कृषि आजीविका का प्रमुख स्त्रोत है और कृषि रसायन इसके विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान देते है किन्तु कृषि रसायनों के अत्यधिक उपयोग ने केवल पर्यावरण अपितु कृषि भूमि के जीवन को भी क्षति पहुँचाई है। अतः कृषि रसायनों का वैज्ञानिक तरीके से प्रयोग अत्यंत आवश्यक है।
डॉ. के. सी. नागर, प्रोफेसर शस्य विज्ञान ने मिट्टी एवं पानी की जाँच करवाकर मृदा स्वास्थ्य कार्ड की सिफारिशों के अनुसार कृषि कार्य करने की सलाह देते हुए कृषि में निर्धारित मात्रा के अनुसार रसायनों के प्रयोग की आवश्यकता प्रतिपादित की।
केन्द्र के एसोसियेट प्रोफेसर डॉ. राजेश जलवानियाँ ने किसानों की आजीविका बढ़ाने हेतु बेमौसम सब्जी उत्पादन एवं उच्च कीमतन फसलें की बुवाई करने की आवश्यकता प्रतिपादित की। फार्म मैनेजर गोपाल लाल टेपन ने केन्द्र की गतिविधियों से अवगत करवाते हुए कृषि रसायनों का छिड़काव करते समय सावधानी बरतने के टिप्स दिए साथ ही कृषि रसायनों के दैनिक जीवन में महत्त्व एवं हानि पर चर्चा की।
प्रशिक्षण में 30 कृषक एवं कृषक महिलाओं ने भाग लिया जिन्हें विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित कृषि कलैण्डर एवं प्याज की पौध का वितरण किया गया।

By Udaipurviews

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