नाकोड़ा पाश्र्व भैरव में भक्ति संध्या में उमडें भक्त

जिन जिन को सेठ बनाया,वो क्या रिश्तेदार थे…..
उदयपुर। श्री नाकोड़ा पार्श्व भैरव भक्ति मंडल हिरणमगरी सेक्टर 4, ओसवाल सभा उदयपुर एवं लोढ़ा भाईपा संस्थान द्वारा स्व. केसरबाई लोढ़ा की पावन स्मृति में आज रविवार को टाउनहाॅल प्रंागण में एक शाम नाकोड़ा पाश्र्व भैरव के नाम भव्य भक्ति संध्या आयोजित की गयी। जिसमें प्रख्यात भजन गायक नरेन्द्र वाणीगोता की मधुर आवाज में नाकोड़ा पाश्र्व भैरव के भजनों की सरिता का खचाखच भरे स्थल पर उमड़े भक्तों ने आनन्द लिया।
भक्ति संध्या में भक्तजन भजनों पर इतने डूब गये उन्होंने नाचते हुए नाकोड़ा भैरव को रिझानें का प्रयास किया। नरेन्द्र वाणीगोता ने चलो बुलावा आया है, दादा ने बुलाया है…,छाएं काली घटायें तो क्या, जिन जिन को सेठ बनाया,वो क्या रिश्तेदार थे…,भैरूजी रो नाम माणे, मीठो घणों लागे…,रूण जूण,रूण जूण करता पधारों म्हारा भैरूजी…,सहित अनेक भजनों पर भक्तजनों को नाचनें पर विवश कर दिया। इससे पूर्व गायक मदन पंवार ने णमोकार महामंत्र भजन की प्रस्तुति दे कर भक्ति संध्या की शुरूआत की।
संस्थान के अध्यक्ष मनोहर तलेसरा ने बताया कि भक्ति संध्या में आने वाले भक्तों के लिये गर्मी से बचाव हेतु कूलर भी लगाये गयेे। नाकोड़ा पाश्र्वनाथ एवं नाकोड़ा भैरूजी का रत्नजणित हार के साथ नयानाभिराम श्रृंगार किया गया। हजारों भक्तों ने कतारबद्ध होकर नाकोड़ा भैरूजी के दर्शन किये।
सचिव हस्तीमल लोढ़ा ने बताया कि भक्ति संध्या से पूर्व दोपहर में श्री वासुपज्य मंदिर सूरजपोल से भव्य वरघोड़ा प्रारंभ होकर विभिन्न मार्गो से होता हुआ टाउनहॉल पंहुचा। जिसमें घोड़े,सैकड़ों भैरव भक्त,बैंड की मधुर धुनों के साथ नाचते झूमते चलें। वरघोड़़ा मंे शामिल भक्तों को निरागरत्न विजय महाराज व कीर्ति रेखाश्री महाराज सा की पावन निश्रा का सानिध्य मिला। प्रारम्भ में भक्ति संध्या में ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा सहित अन्य अतिथियों का मण्डल सदस्यों मनीष बोहरा,पारसमल खोखावत,संजय इंटोदिया, ंसजय खमेसरा,भरत दाणी,ललित लोढा,नरेश लोढ़ा, दिलीप लोढ़ा व राजेश नलवाया,विमल बोहरा,महावीर बोहरा, राजेश नलवाया,दीक्षित तलेसरा,अशेाक बोकड़िया, संजीव लोढ़ा, संजय चैधरी,महावीर खोखावत ने उपरना एवं पगड़ी पहनाकर, तथा स्मृतिचिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। गौतम प्रसादी के लाभार्थी चिंतन लोढ़ा परिवार था। भक्ति के मुख्य आयोजक अमृतलाल,रमेश, दर्शन एवं चिंतन लोढ़ा परिवार थे।

By Udaipurviews

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