उदयपुर. हर पल हजारों जीव जन्म लेते हैं और मानव रूप में इस धरती पर अवतार लेते रहते हैं, लेकिन हर किसी की जयंती नहीं मनाई जाती है। न ही सभी को श्रद्धा और सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। केवल उन्हीं लोगों को सम्मान और श्रद्धा मिलती है जो अपने लिए नहीं बल्कि समाज के लिए जीते हैं। जो लोगों के उत्थान, विकास और कल्याण के लिए अपनी सारी जीवन शक्ति समर्पित कर देते हैं। ये विचार रविन्द्र मुनि जी म.सा.नीरज ने श्रमण संघ के द्वितीय आचार्य आनन्द ऋषि म.सा. की 124वीं जन्मजयंती पर महावीर साधना, अम्बामाता की धर्म सभा में कहे। रविन्द्र मुनि ने कहा आनन्द ऋषि म.सा. गुणों की खान थे। श्रमण संघ के इतिहास में आचार्य आनन्द ऋषि का कार्यकाल स्वर्णिम रहा। अध्यक्ष प्रकाश कोठारी
ने बताया कि सुबह सामायिक साधना के साथ सामूहिक रूप से नवकार मंत्र का जाप किया गया। चन्द्रकान्ता सहलोत ने आनन्द ऋषि जी के जीवन से जुड़ी बातों के बारे में जानकारी दी। वहीं नंदलाल सेठिया, शारदा तलेसरा ने आचार्य श्री के बारे में अपने विचार व्यक्त किए।
