उदयपुर। समता मूर्ति साध्वी जयप्रभी की सुशिष्या साध्वी डॉ. संयम ज्योति ने कहा कि कर्म सत्ता से आत्म सत्ता को मुक्त करने के लिए सबसे सरल उपाय भगवान की भक्ति है। भक्ति भव ताप मिटाती है, भव सिंधु से तिराती है, भगवान भक्त में भेद नहीं, भक्ति भगवान बनाती है।
साध्वी ने कहा कि सतयुग में मुक्ति प्राप्त करने के लिए कठोर कठोर तपस्या करते थे फिर भी मुक्ति मिलेगी गारन्टी नही थी। त्रेतायुग में व्यक्ति कमजोर हुआ, भवक्ति के साधन बदले, व्यक्ति अश्वमेध यज्ञ आदि करने लगे। द्वापर युग में व्यक्ति और कमजोर हुआ। कई प्रकार की पूजा पद्धतियां आई। कलयुग में व्यक्ति ज्यादा कमजोर हुआ। आयु 100 वर्ष की हुई। कलयुग में प्रभु नाम ही सहारा है। अन्तःकरण से प्रभु नाम का स्मरण करने वाला एनरजेटिक बनता है, शत्रु मित्र बन जाते है। कॉम्पलीकेटेड प्रॉब्लम सरल बन जाती है। उसका शीघ्र ही समाधान हो जाता है, विष अमृत में बदल जाता है। साध्वी ने कहा कि प्रभु नाम का जप प्रभावशाली होता है। ज का अर्थ जल्दी प का अर्थ परिणाम अर्थात् जप जल्दी परिणाम लाता है।
साध्वी ने कहा कि जप तीन तरह के होते है। उपांशु जाम में एकदम मंद आवाज में प्रभु का स्मरण किया जाता है। मानस जाप श्रेष्ठ कोटि का होता है। इसमें जाप बिना आवाज के मन में एकाग्रता से किया जाता है। व्यक्ति का लक्ष्य अजपा जाप तक पहुँचना होना चाहिए अर्थात् हर श्वास में स्वतः ही प्रभु नाम का स्मरण चलता रहे।
भगवान की भक्ति कर हम कर्म सत्ता से आत्म सत्ता को मुक्त कर सकतेःसंयम ज्योति
