बाँसवाड़ा, 19 अप्रेल/बांसवाड़ा शहर के सिंहवाव क्षेत्र स्थित श्री कपिल गणेश एवं श्री केदारेश्वर महादेव मन्दिर के 3 दिवसीय पुनर्प्रतिष्ठा महोत्सव के दूसरे दिन शनिवार को विभिन्न महत्त्वपूर्ण प्रतिष्ठा प्रयोग विधि-विधान से हुए। प्रतिष्ठा अनुष्ठानों के दर्शन तथा यज्ञ मण्डप की परिक्रमा कर पुण्य लाभ पाने के लिए दिन भर भक्तों का आवागमन बना रहा।
ये सभी अनुष्ठान प्रधान आचार्य पं. पंकज पण्ड्या एवं पं. भावेश पण्ड्या तथा प्रतिष्ठा आचार्य पं. यज्ञनारायण पण्ड्या और उपाचार्य पं. कमलकान्त पण्ड्या, प्र. प्रदीप भट्ट आदि के निर्देशन एवं आचार्यत्व में हुए।
पण्डितों के समूह ने किया रूद्राभिषेक विधान
महोत्सव के अन्तर्गत शनिवार को शुक्रवार को विंध्यवासिनी अष्टमी मण्डल एवं प्रदोष मण्डल और अन्य मण्डलों के पण्डितों की ओर से रूद्रार्चन महानुष्ठान किया।
इसमें पं. हर्षवर्धन व्यास एवं पं. प्रदीप मुरलीधर भट्ट के आचार्यत्व में हुए विविध दिव्य एवं दैवीय अनुष्ठानों में पं. महेन्द्र पाठक, अक्षय पंड्या, ईश्वरदास वैष्णव, अरविंद पाठक, नरहरि एच. भट्ट, पंकज रामेश्वर पंड्या, सुभाष भट्ट, भरत व्यास, मुकेश पाठक, अशोक चौबीसा, शरद व्यास, जगदीश वैष्णव, दिनेश जोशी आदि पण्डितों ने हिस्सा लिया और वागड़ की वैदिक परम्परा के अनुसार रूद्र ऋचाओं से रूद्रार्चन किया।
शास्त्रीय पद्धति से अधिवास और प्रासाद वास्तु अनुष्ठान हुए
शनिवार को नवनिर्मित प्रासादों का वास्तु विधान हुआ। इनमें कपिल गणेश प्रासाद वास्तु विधान अनन्त जोशी तथा केदारेश्वर प्रासाद वास्तु शरद व्यास तथा परिवार ने किया।
इसके साथ ही श्री कपिल गणेश एवं श्री केदारेश्वर महादेव की प्राचीन प्रतिमाओं के साथ ही शिव जलाधारी, श्री शीतला माता, पार्वती, श्री हनुमानजी, नंदी, रिद्धि-सिद्धि आदि विभिन्न दैव प्रतिमाओं, कलश, शिखर कलश, ध्वज दण्ड आदि का जलाधिवास, धान्यादिवास, पुष्पाधिवास, फलाधिवास, धूपादिवास, घृताधिवास आदि समस्त अधिवास विधान पूर्ण किए गए। विभिन्न अधिवासों के उपरान्त शैय्याधिवास विधान किया गया।
दैव प्रतिमाओं के विविध अधिवासों के दौरान् सभी यजमानों ने वैदिक ऋचाओं एवं पौराणिक मंत्रों से पूजन-अर्चन के विधान सम्पन्न किए। इससे पूर्व शनिवार प्रातः स्थापित देवताओं के पूजन के उपरान्त प्रतिष्ठा हवन, वैदिक पद्धति से रूद्रयाग, दिक्षु होम, तत्त्व न्यास आदि हुए।
वैदिक ऋचाओं से यज्ञार्चन की गूंज
महोत्सव के प्रतिष्ठा अनुष्ठान एवं नौकुण्डीय यज्ञकर्म के मुख्य यजमान पूर्व सभापति जैनेन्द्र त्रिवेदी सहित यजमान परिवारों में सम्मिलित देवेश त्रिवेदी, डिम्पल त्रिवेदी, संतोष त्रिवेदी, सुभाष त्रिवेदी, प्रज्ञा जोशी, अनन्त जोशी, प्रतिभा जोशी, हेमन्त जोशी, महादेवी जोशी, देवकीनंदन जोशी, विमला सनाढ्य, अमृतलाल सनाढ्य, चार्वी भट्ट, अचल भट्ट, अंतिम पण्ड्या, दीपेश पण्ड्या, स्वाति व्यास, शरद व्यास, पुष्पादेवी भट्ट, रिया जोशी, वार्तिक जोशी आदि ने वैदिक रूद्र ऋचाओं से यज्ञार्चन एवं विभिन्न अनुष्ठानों में परिवार सहित भाग लिया।
समापन रविवार को, प्रातः कलश यात्रा, मध्याह्न में प्रतिष्ठा
महोत्सव के अंतिम दिन 20 अप्रेल, रविवार को प्रातः 7 बजे भव्य कलश यात्रा निकाली जाएगी। प्रातः 8 बजे अंतिम दिवस के धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम आरंभ होगा। इसमें स्थापित देवताओं के पूजन-अर्चन के उपरान्त शान्ति-पौष्टिक हवन, मूर्ति प्रतिष्ठा, शिखर प्रतिष्ठा अनुष्ठान होंगे। मध्याह्न 12 बजे यज्ञ पूर्णाहुति एवं महा आरती होगी तथा दोपहर 1 बजे से महाप्रसादी का आयोजन आरंभ होगा।
