उदयपुर, 20 अक्टूबर। केशवनगर स्थित अरिहंत वाटिका में आत्मोदय वर्षावास में रविवार को आचार्य श्री नानालाल जी म.सा. की 25वीं पुण्यतिथि पर हुक्मगच्छाधिपति आचार्य श्री विजयराज जी म.सा. ने कहा कि आचार्य श्री नानेश ने हम अज्ञ बालकों को संयम व संयम में प्रसन्नता प्रदान की। छोटे-छोटे गांव या छोटी जगह पर गुरूदेव होते और हम होते, तब वे ज्ञान का पिटारा खोल देते। वे खजाना लुटाते और हम मकरंद व वात्सल्य लूटते। उनके अनुभव व शिक्षाएं ही हमारी विरासत है। मेरे सीमित शब्द असीम भावों को व्यक्त करने में असमर्थ है। आचार्य नानेश का वर्चस्वी, तेजस्वी, यशस्वी व्यक्तित्व आज भी हमारे बीच में है। हम व्यक्तित्व के ही पुजारी हैं। गुरू प्रेरणा देते हैं, प्रकाश दिखलाते हैं, पावर देते हैं व पथ दिखलाते हैं, उस पर चलने का पुरूषार्थ तो हमें ही करना है। जो चलता है वही मंजिल पाता है। उपाध्याय श्री जितेश मुनि जी म.सा. ने आचार्य नानेश के संयमपूर्ण जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने विनय सहित अपने गुरू की खूब सेवा की। कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य रखा, उनके पास साधु-संत रूपी पूंजी सीमित थी, सहयोग भी कम था पर गुरू का आशीर्वाद भरपूर था। उन्होंने कई महापुरूषों के जीवन को गड़ा। वे मजबूत आत्मबल के धनी थे। आचार्य श्री विजयराज जी म.सा. के आचार्य चादर पदारोहण दिवस पर कहा कि सभी लोग आचार्य विजय में अपने-अपने इष्ट आचार्यों की छवि का दिग्दर्शन करते हैं। श्रद्धेय श्री विनोद मुनि जी म.सा. ने कहा कि इन दोनों पुनीत प्रसंगों पर सविधि लोगस्स जिसे चतुर्विंशस्तव कहा जाता है, की सामूहिक आराधना करवाई। आपने स्तव व स्तुति का अन्तर स्पष्ट करते हुए शरीर के सात चक्र, मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपुर चक्र, अनाहद, विशुद्धि, आज्ञा व सहस्त्र चक्र पर ध्यान केन्द्रित कराते हुए प्रत्येक चक्र पर 6-6 बार लोगस्स का उच्चारण कराते हुए साधना-आराधना करवाई। इसके तीन चरण करवाए। श्रीसंघ मंत्री पुष्पेन्द्र बड़ाला ने बताया कि आज प्रवचन सभा में रामपुरा संघ का श्रीसंघ उपस्थित हुआ। श्री विशाल सामोता ने भजन प्रस्तुुत किया। जाप में 1100 श्रद्धालुओं ने भाग लिया। प्रभावना निर्मला नरपत हरकावत की ओर से वितरित की गई।
आचार्य नानेश के अनुभव व शिक्षाएं ही हमारी विरासत है : आचार्य विजयराज
