उदयपुर। न्यू भूपालपुरा में स्थित अरिहंत भवन में णमोत्थुणं सिद्ध साधक वचन सिद्ध योगी आचार्य प्रवर ज्ञानचंद्र महाराज ने बड़ों की छाया सब कुछ पाया“ विषय पर धर्म सभा में कहा कि घर का मुखिया बनना आसान नहीं है। जो टीन शेड के समान है। वो बारिश, ओला, तूफान सब सहन करता है, फिर भी लोग कहते हैं यह गम जल्दी होता है और आवाज भी करता है। मां-बाप भी शेड के समान है। वे सब कुछ झेलते हैं। यह शेड ही बचा रहा है, सुरक्षा दे रहा है, फिर भी ना समझा बच्चे इसे नहीं समझ पाते हैं।
वे मां-बाप से अलग रहना पसंद करते हैं। उन बच्चों को यह पता नहीं है, जब से बच्चा पैदा होता है, मां-बाप की अपनी इच्छा खत्म हो जाती है। वो खिलाने पिलाने में भी पहले बच्चे को खिलाते हैं, फिर बच्चे भी उनको नहीं समझते हैं।
उन्होंने कहा कि जिन्होंने खिलाया, पढ़ाया, कमाना सिखाया, शादी की। उनको ही सुनना पड़ रहा है। ये शेड गर्म जल्दी होता है और बड़बड़ करता है। यह उन नासमझ बच्चों की समझ हो सकती है, लेकिन ऐसा नहीं है। छत का साया महत्वपूर्ण है। दिल्ली से सुनील जैन आदि सपरिवार उपस्थित हुए। आदर्श त्यागी सुदर्शन मुनि महाराज के 18, महिला रत्न श्री मीनू जी के सात की तपस्या चल रही है। इसके अतिरिक्त भी तपस्या जारी है। इसी तरह कपासन, चित्तौड़, भीलवाड़ा, गोगुंदा, वल्लभनगर, फतेहनगर आदि कई क्षेत्रों से भक्तगण निरंतर आ रहे हैं।
गुरु माता-पिता रूप छत का साया महत्वपूर्ण होता -आचार्य ज्ञानेश
