उदयपुर, 29 अगस्त। केशवनगर स्थित नवकार भवन में आत्मोदय वर्षावास के तहत हुक्मगच्छाधिपति आचार्य श्री विजयराज जी म.सा. ने गुरूवार को धर्मसभा में फरमाया कि जीवन में दो बातों का उपयोग रखना चाहिए, पहली-कड़वी बात का मीठा जवाब दो, दूसरी-क्रोध का प्रसंग उपस्थित होने पर चुप रहें। कोई कड़वी बात कहे या तो उसे सुन लो या सह लो अगर जवाब देना ही पड़े तो मीठा जवाब दें। ऐसा करने पर सामने वाला ही सॉरी कहेगा। ये शब्द ही होते हैं जो जला देते हैं और ये शब्द ही है जो ‘‘जी’’ ला देते हैं। अनुपयोग के साथ बोले गए शब्द जला देते हैं और उपयोग के साथ बोले गए शब्द जी ला देते हैं। शब्दों से आय-व्यय भी होता है। यदि कभी क्रोध के प्रसंग उपस्थित हों तो चुप रहें। अगर आप अशान्ति रखेंगे तो शान्ति कैसे रहेगी ? व्यक्ति को क्रोध तभी आता है जब उसके अहं पर चोट होती है। मैं और मेरा, यही समस्याओं का घेरा है। हम और हमारा यही समाधान का उजियारा है। एक क्षण का क्रोध जिंदगी भर का पश्चाताप छोड़ जाता है। अतः क्रोध के समय मौन रहें। उपाध्याय श्री जितेश मुनि जी म.सा. ने कहा कि आय से अधिक व्यय नहीं करने वाला ही सुखी रह सकता है। आय से कम खर्च करना व अनावश्यक खर्चों को कम करने में ही समझदारी है। अर्थशास्त्र का सिद्धान्त है कि पैसा पैसे को खींचता है। बारह व्रतों में से 7वां उपभोग परिभोग परिमाण व्रत के अनुसार अपनी आवश्यकताओं को घटाएँ। इससे बचा हुआ पैसा व बढ़ा हुआ पुण्य आपको अमीर बना देगा। श्रीसंघ अध्यक्ष इंदर सिंह मेहता ने बताया कि पर्युषण में नवरंगी, तेले तप की आराधना, पौषध, सामायिक के पचोले, महिला-पुरूषों में नवकार मंत्र का अखंड जाप सहित अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
एक क्षण का क्रोध जिंदगी भर का पश्चाताप छोड़ जाता है जब क्रोध आए तब मौन रहें : आचार्य विजयराज
