उदयपुर। न्यू भूपालपुरा स्थित अरिहंत भवन में विराजमान आचार्य प्रवर ज्ञानचंद्र महाराज ने आज धर्मसभा में बोलते हुए कहा कि परीक्षा में राष्ट्रपति की जगह प्रधानमंत्री का नाम लिख दिया तो बहुत बड़ा अपराध नहीं हो गया। दिल्ली से जम्मू जाने के लिए जम्मू की ट्रेन में ना बैठकर अमृतसर की ट्रेन में बैठ गए तो कोई भारी गलती नहीं हो गई। लेकिन 2$1=3 होते हैं, उसके जगह आपने 2$1=4 बताए तो गणित का समीकरण ही बिगड़ जाता है। ऐसी गलती अक्षम्य होती है। ऐसे अपराधों से बचें।
उन्होंने कहा कि जो जिंदगी का ट्रेक ही चेंज कर देते हैं। पुरी लाइफ ही बिगाड़ देते हैं। कल मैंने आज के युग में अपने पराए को लेकर जो घटना घट रही है उनमें से तीन चार घटनाओं का उल्लेख किया। जब श्रोताओं को पता लगा कि ऐसी घटनाएं भी काम की है, तो एक भाई ने आकर चार-पांच लेटेस्ट घटी घटनाएं और बता गया। आप तो आज की दुनिया में हर दिन नहीं, बल्कि हर समय अपडेट रहते हैं। हम तो इधर-उधर से सुनकर ही जान पाते हैं। क्योंकि मेरी तो अखबार पढ़ने की भी आदत नहीं है। जो लोग बता देते हैं, उसे ही समझ लेते हैं।
प्रभु महावीर ने कहा था कि आत्मा ही आत्मा का कर्ता है। दूसरे व्यक्ति तो निमित है। अतः मूल कारण हम स्वयं हैं, उसे ठीक किया जाए। स्वयं को सुधारा जाए। स्वयं सुधर गए तो घर सुधर गया, समाज सुधर गया, देश सुधर गया।
आज आचार्य प्रवर ने संयोग वियोग की व्याख्या करते हुए सच्चा सुख दो से नहीं, अकेला रहकर आत्मरमणता में है। आज बुरहानपुर से नाहटा परिवार, इसी तरह सवाई माधोपुर आदि कई स्थलों से दर्शनार्थी उपस्थित हुए।
आचार्य प्रवर की बुखार की स्थिति के बावजूद भी उनके प्रवचन निरंतर जारी है। उनका मानना है जब व्यक्ति मनोयोग पूर्वक काम करें तो बीमारी दूर हट जाती है। प्रतिदिन 5 5 सामायिकें चल रही है। उपहार के लाभार्थी नररत्न में किशोर आशा मेहता मुंबई थे।
छोटी सी गलती जीवन की दिशा बदल देतीःआचार्य ज्ञानचंद्र महाराज
