संस्थापक अध्यक्ष मुकेश माधवानी ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य ध्येय संगीत जगत की उभरती प्रतिभाओं को मंच देना और पारंपरिक ग़ज़ल विधा को नई पीढ़ी तक पहुँचाना है। उन्होंने कहा कि संस्था का प्रयास है कि भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से उदयपुर की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जाए।
संस्था के सचिव अरुण चौबीसा ने बताया कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों से न केवल समाज में सकारात्मकता आती है, बल्कि कला के प्रति नई रुचि भी जागृत होती है। इसीलिए हम इस तरह के कार्यक्रम आयोजित कर नई पीढ़ी को इससे रूबरू करवाते हैं।
कोषाध्यक्ष योगेश उपाध्याय ने बताया कि हमारा उद्देश्य उदयपुर की छिपी हुई संगीत प्रतिभाओं को एक सशक्त मंच प्रदान करना है। ‘शाम-ए-ग़ज़ल’ के माध्यम से हम पारंपरिक गायकी को जीवित रखने और युवाओं को इस समृद्ध विरासत से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।
कार्यक्रम की संयोजिका मधु केवल्या ने बताया कि इस संगीतमय महफिल में दिव्या सारस्वत, नूतन वेदी, नीलम पटवा और राजलेश जीनगर के साथ पूरी टीम अपना सहयोग दे रही है।
