उदयपुर। श्री अरिहंतमार्गी जैन महासंघ शाखा उदयपुर के तत्वावधान में आचार्य ज्ञानचन्द्र महाराज का आज ओरबिट रिसोर्ट स्थित अरिहंत भवन में आयोजित धर्मसभा में आचार्य ज्ञानचंद्र महाराज ने कहा कि आज चार्तुमासिक स्वाध्याय महोत्सव का प्रथम दिवस है। महावीर प्रभु की मूल वाणी का जय घोष किया गया। महावीर तक पहुंचने का मुख्य साधन है, उनकी वाणी।
उन्होंने कहा कि अगर हम महावीर के आकार का चिंतन करते हैं तो हमारा चिंतन महावीर के तन तक ही पहुंचता है। लेकिन हम महावीर की वाणी को पढ़ते, सुनते, बोलते, मनन करते हैं तो हम महावीर की आत्मा तक पहुंचते हैं। तन विनाशी है, आत्मा अविनाशी है, अजर अमर है।
स्वाध्याय महोत्सव में महावीर की आत्मा से हमारी आत्मा का सीधा संस्पर्श करना है। जैन शास्त्रों में स्पष्ट लिखा है सिद्धा जैसो जीव है, जीव सोही सिद्ध होय। जीव और सिद्ध में, आप में और परमात्मा में कोई फर्क नहीं है। बस बीच में जो अहंकार है उसे हटाइए।
जिस तरह नींबू के रस की एक बूंद हजारों लीटर दूध को बर्बाद कर देती है। इसी तरह मनुष्य का अहंकार सारे रिश्तों को बर्बाद कर देता है। अहंकार दिखाकर किसी रिश्ते को तोड़ने से अच्छा है, माफी मांग कर वो रिश्ता निभाया जाए। शॉर्टसर्किट से डिस्कनेक्ट कनेक्शन भी माफी द्वारा जुड़ जाते हैं।
आज की सभा में सुप्रसिद्ध समाजसेवी आनंदीलाल संचेती का, धनेश जैन दिल्ली, सुनील श्रीमाल, सुरेश बंब जलगांव, समाजसेवी ओमप्रकाश एवं महिलारत्न श्रीमती लक्ष्मी देवी जैन, अशोक कांठेड़ का श्रीमती अनुराधा,श्रीमती सीमा आदि ने स्वागत किया।
जैनाचार्य ज्ञानचंद्र महाराज के सानिध्य में स्वाध्याय महोत्सव में सुख विपाक सूत्र का पूर्ण गरिमा के साथ सस्वर उच्चारण पूर्वक मनन किया गया। आज दिल्ली अरिहंत नगर से नररत्न जतिन, शिखा जैन गुरु चरणों में उपस्थित हुए प्रवचन श्रवण का लाभ लिया। संतरत्न अजीत मुनि महाराज की तपस्या के उपलक्ष्य में प्रवचन के बाद की प्रभावना का लाभ सुरेश बंब एवं सुनील श्रीमाल जलगांव वालों ने लिया।
नींबू के रस की एक बूंद हजारों लीटर दूध को बर्बाद कर देती, उसी तरह मनुष्य का अहंकार सारे रिश्तों को बर्बाद कर देता आचार्य ज्ञानचन्द्र
