उदयपुर 24 दिसंबर । समुत्कर्ष समिति द्वारा गुरु गोबिन्द सिंह जी के चार साहिबज़ादों के अमर बलिदान की स्मृति में देशभर में मनाए जाने वाले वीर बाल दिवस के परिप्रेक्ष्य में आज “स्वधर्मे निधनम् श्रेय:” विषयक 141 वीं समुत्कर्ष विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।
संयोजक हरिदत्त शर्मा के अनुसार समुत्कर्ष समिति के समाज जागरण के ऑनलाइन प्रकल्प समुत्कर्ष विचार गोष्ठी में अपने विचार रखते हुए वक्ताओं ने कहा कि सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के चार साहिबज़ादों का बलिदान एक ऐसा स्वर्णिम अध्याय है जो मानव इतिहास में अदम्य साहस, त्याग और धर्मनिष्ठा की चरम सीमा को उजागर करता है। इन चारों साहिबजादो का बलिदान यह स्मरण करने का माध्यम है कि अपने धर्म या कर्तव्य का पालन करते हुए मृत्यु को प्राप्त होना, पराये धर्म का पालन करने से कहीं अधिक श्रेष्ठ और कल्याणकारी है l साथ ही यह देश की भावी पीढ़ी में चरित्र निर्माण, नैतिक साहस और राष्ट्रधर्म की जीवंत शिक्षा का प्रतीक भी है।
शिक्षाविद संदीप आमेटा ने अपने संबोधन में कहा कि वीर बाल दिवस भारतीयता की रक्षा के लिए कभी न हार मानने वाले मनोभाव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह दिन हमें स्मरण दिलाता है कि जब वीरता की पराकाष्ठा की बात आती है तो उम्र कोई मायने नहीं रखती है। सिख गुरुओं की पावन विरासत के इस बलिदान पर्व में गुरु गोबिंद सिंह जी और उनके चार वीर साहिबजादों का साहस और आदर्श आज भी हर भारतीय को जीवन की वास्तविक राह दिखाते हैं।
इस अवसर पर विचारक आर्य सत्यप्रिय ने कहा कि चिड़ियों से मैं बाज लड़ाऊं, गीदड़ों को मैं शेर बनाऊं, सवा लाख से एक लड़ाऊं, तभी गोविंद सिंह नाम कहाऊं, गुरू गोविंद सिंह का ये कथन ना सिर्फ उनके लिए बल्कि उनके पुत्रों के जीवन का भी परिचय कराता है, जिन्होंने कम उम्र में बलिदान की एक ऐसी इबारत लिखी जिसे भूलाया नहीं जा सकता lउन्होंने धर्म और राष्ट्र को सर्वोपरि मानते हुए अपने साहस का लोहा मनवाया, स्वधर्म रक्षणार्थ अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया परन्तु अपना शीश नहीं झुकाया l
विचार गोष्ठी में मंगलाचरण का पाठ पीयूष दशोरा ने किया l ऑनलाइन सत्र में चर्चा के दौरान तरुण शर्मा, चिराग सैनानी ने बताया कि गुरू जी की तीन पीढ़ियों ने देश धर्म की रक्षा के लिए महान बलिदान दिया। दो पुत्र अजीत सिंह और जुझार सिंह चमकौर गढ़ी के युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए । मुगल शासक वजीर खां द्वारा दो पुत्रों जोरावर सिंह और फतेह सिंह को सरहिंद में दीवार में जीवित ही चुनवा दिया गया ।
समुत्कर्ष पत्रिका के उप संपादक गोविन्द शर्मा द्वारा आभार प्रकट किया गया l गोष्ठी का संचालन सत्यप्रिय ने किया तथा सहयोग शिवशंकर खण्डेलवाल ने किया ।
इस ऑनलाइन विचार गोष्ठी में डॉ. दिनेश बंसल, त्रिभुवन चौबीसा,मुकेश जैन, राजेश अग्रवाल,नरेन्द्र कुमार जोशी, राघव, डॉ. भरत जोशी, तरुण कुमार दाधीच, गिरीश कुमार चौबीसा तथा सुरेश पंचाल भी सम्मिलित हुए।
