उदयपुर, 3 दिसंबर। चित्रांश महासभा द्वारा भारत रत्न एवं भारतीय संविधान के प्रथम अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जन्म तिथि पर विशेष श्रद्धांजलि सभा बड़े हर्षोल्लास के साथ आयोजित की गई। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा पर माल्यार्पण और श्रद्धासुमन अर्पित कर की गई।
सभा में चित्रांश दीपक श्रीवास्तव ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भारतीय संविधान का जनक बताते हुए कहा कि उन्होंने संविधान निर्माण की 22 समितियों में समन्वय कर राष्ट्र के हित में अद्वितीय योगदान दिया। उन्होंने बताया कि विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों और सुझावों को संविधान में समाहित करने का श्रेय डॉ. राजेंद्र प्रसाद के कुशल नेतृत्व को जाता है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि एक बार सदन की कार्यवाही के दौरान पत्नी के निधन का संदेश मिलने पर भी डॉ. प्रसाद सदन समाप्त होने तक नहीं उठे—यह उनकी कर्तव्यनिष्ठा और देशप्रेम की अद्वितीय मिसाल है।
कार्यक्रम में उनकी समकालीन रहीं राजेश्वरी श्रीवास्तव ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद के शैक्षणिक एवं राष्ट्रनिर्माण से जुड़े उल्लेखनीय कार्यों पर प्रकाश डालते हुए उपस्थित जनों को प्रेरणादायी संबोधन दिया।
चित्रांश महासभा महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष श्रीमती मीनाक्षी रायजादा ने उनके व्यक्तित्व, राष्ट्र सेवा, आजादी की लड़ाई में उनकी भूमिका, कार्यकुशलता और महिलाओं के प्रति सम्मान जैसे पहलुओं को विस्तार से बताया।
कार्यक्रम में सभी उपस्थित जनों ने पुष्पांजलि अर्पित कर “सर्वे भवन्तु सुखिनः” का उद्घोष करते हुए डॉ. राजेंद्र प्रसाद को नमन किया। इस अवसर पर चित्रांश कार्यकारिणी ने श्रीमती राजेश्वरी श्रीवास्तव, चित्रांश दीपक श्रीवास्तव, डॉ. आशीर्वादलाल तथा महान इतिहासकार की पौत्री अर्चना श्रीवास्तव का सम्मान किया गया।
पूरे आयोजन का संचालन चित्रांश महासभा के सचिव डॉ. राकेश माथुर ने किया। सभा में संकल्प लिया गया कि हर वर्ष 3 दिसंबर को डॉ. राजेंद्र प्रसाद जयंती को एक उत्सव के रूप में मनाया जाएगा।
कार्यक्रम को सफल बनाने में मोतीलाल माथुर, सतीश भटनागर, कमल रायजादा, गौरीशंकर भटनागर, अमित माथुर, रमेश भटनागर सहित महिला प्रकोष्ठ की 20 सदस्यीय कार्यकारिणी ने विशेष योगदान दिया।
