आत्म दर्शन से ईश्वर प्रसन्न होते हैं और प्रदर्शन से इंसान -जैनाचार्य ज्ञानचंद्र महाराज
उदयपुर। न्यू भूपालपुरा स्थित अरिहंत भवन में विराजमान आचार्य प्रवर ज्ञानचंद्र महाराज ने आज के धर्म सभा में कहा कि आत्म दर्शन से ईश्वर प्रसन्न होते हैं और प्रदर्शन से इंसान। उन्होंने कहा कि यह आप पर निर्भर करता है,आप किसे प्रसन्न करना चाहते हैं। ऊपर ऊपर से तो हम सब कह रहे हैं कि ईश्वर, परमात्मा, अरिहंत देव को प्रसन्न करना चाहते हैं, लेकिन यह बतलाइए, आपने अच्छे कपड़े किसके लिए पहने, नई गाड़ी किसके लिए खरीदी, बंगले का फर्नीचर एवं आकर्षक पेंट किसके लिए कराया। यह ईश्वर को खुश करने के लिए नहीं, यह प्रदर्शन दुनिया को दिखाने के लिए किया जा रहा है। यह दिखावा भी अधिक समय तक नहीं टिकता। आपने जो बंगला बनाया है, कुछ ही वर्षों में आपसे भी बढ़कर बंगला आपके पड़ोस में दिखता है। उसकी खुशी भी टिकने वाली नहीं है। क्योंकि कुछ ही समय बाद उससे भी बढ़कर बंगला बनता नजर आएगा। यही स्थिति कपड़े, गहने एवं मोबाइल, गाड़ियों के साथ हो रही है। यह सब भी दिखाने के साधन फीके एवं स्वयं के लिए ही उपहास के कारण बन रहे हैं। अतः इंसान को नहीं, परमात्मा को प्रसन्न करिए,इसके लिए अपनी पात्रता बढाइए। इसकी शुद्धि के लिए दूसरों की अच्छाइयों के प्रति हमारे भीतर सम्मान के भाव हों।
हम दूसरों के गुणों को सुनकर ईर्ष्या ना करें। बल्कि हमें अंदर में खुशी होती है तो समझ लो, आपकी आत्मा आध्यात्मिक दृष्टि से ऊपर उठ रही है।
णमोत्थुणं जाप का शुभारंभ करते हुए आचार्य श्री ने कहा किइसके माध्यम से हमें अपने प्राणों में परमात्मभक्ति की प्रतिष्ठा करनी है। हमारे रोम रोम में अरिहंतों की भक्ति समा जाए, यही हमारा प्रयास हो। जब भक्ति में भगवान समा जाएंगे, तब भक्त के द्वारा कोई पाप हो ही नहीं सकता।
5 अगस्त से 13अगस्त 9दिवसीय णमोत्थुणं आज से जाप प्रारंभ हो गया। चारों ओर से चेन धर्माव लंबी सवेरे 8ः00 बजाते ही उमर कुमार कर आ रहे हैं 8ः30 बजे पूरा खोल खचाखच भर गया है आचार्य जी ने 8ः30 से निरंतर उपस्थित समुदाय को जब का रसास्वादन करवाया।
13 दिवसीय धर्म जाप साधना शिविर प्रारम्भ
