विघि पूर्वक किया गया कार्य अनुष्ठान चित्त की आकुलता को दूर करताःसाध्वी संयम ज्योति

उदयपुर। सुरजपोल बाहर स्थित दादाबाड़़ी में चल रहे चातुर्मास में साध्वी संयम ज्योति ने कहा कि किसी भी कार्य की सिद्धी के लिये सफलता प्राप्त करने के लिये उस विषय संबंधित एक्सपर्ट स्पेशलिस्ट से कनेक्ट करना आवश्यक है।
उन्हेांने कहा कि एक्सपर्ट के गाईड के अनुसार विधिपूर्वक उस कार्य को करना आवश्यक है। अवधि में किया हुआ कार्य उचित सफलता नहीं दे सकता।
उन्होंने कहा कि धर्म के क्षेत्र में भी धर्माचार्य का सानिध्य आवश्यक है। धर्माचार्य ही आपको कौनसा धर्मानुष्ठान कब करना,कैसे करना, कहां करना, बता सकते है। विघि पूर्वक किया गया कार्य अनुष्ठान चित्त की आकुलता को दूर करता है। राग द्वेष के तुफान को शंात करता है और चित्त को प्रसन्नता से भर देता है।
इस अवसर पर साध्वी संयम साक्षी ने गीतिका प्रस्तुत करते हुए कहा कि जो इंसान नहंी बनता है वो हैवान होता है। अरे कया करेगा प्यार वो भगवान को,क्या करेगा प्यार वो इंसान को,जो जन्म ले कर गोद इंसान के,कर न सका प्यार वो इंसान को। उन्होंने कहा कि नर ही नारायण बन सकता है बशर्ते पहले वो इंसान बनें।

By Udaipurviews

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