उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर स्थित दादाबाड़ी में समता मूर्ति साध्वी जयप्रभा की सुशिष्या साध्वी डॉ. संयम ज्योति ने अपने नियमित व्याख्यान में कहा कि मैनेजमेन्ट के युग में सर्वप्रथम हैल्थ मैनेजमेन्ट आवश्यक है क्योंकि हैल्थ इज वैल्थ है।
साध्वी ने आहार शब्द को परिभाषित करते हुए कहा आ का अर्थ है आरोग्यवर्धक, हा का अर्थ है हानि और र का अर्थ है रहित अर्थात जो शारीरिक और मानसिक रूप से आरोग्य वर्धक और हानि रहित हो उसे ष्आहारष् कहते है।
साध्वी ने कहा- कब खाना, कैसे खाना, क्या खाना, क्यो खाना और कितना खाना हैल्थ मैनेजमेन्ट के लिए इन बातों को जानना आवश्यक है। आयुर्वेद में चरक संहिता में हैल्थ मैनेजमेन्ट के संबंध में उल्लेख मिलता है हित भुक, मित भुक और अशाक भुक नियम का पालन करना आवश्यक है। हित् भुक अर्थात, जो हितकारी वस्तुए है उनका ही सेवन करना, मित भुक अर्थात सीमित भोजन करना और अशाक अति मात्रा में सब्जी फल का सेवन नहीं करना। साध्वी ने कहा- जो खाने के लिए जीते हैं, ज़्ज़वे जल्दी मरते है और जो जीने के लिए खाते है वे ज्यादा जीते है।
साध्वी संयम साक्षी ने कहा- मनुष्य जन्म संयम के लिए मिला है। पदम नाणं तओ दया अर्थात पहले जीवों के स्वरूप को जानो फिर दया करो। जीवों के स्वरूप को जाने बिना जीवों पर दया नहीं की जा सकती। जब तक संयम नही मिलता तब तक ऐसी प्रवृतियाँ करो जिससे धर्म में से पाप माईनस हो। जिन प्रवृत्तियों से पाप में से धर्म माईनस होगा तो वे प्रवृतियाँ व्यक्ति के पतन का कारण बनेगी और व्यक्ति जीवों पर करुणा नही कर पायेगा।
शारीरिक और मानसिक रूप से आरोग्यवर्धक और हानि रहित अहार करेंः साध्वी संयमज्योति
