उदयपुर, 17 जुलाई। केशवनगर स्थित अरिहंत वाटिका में आत्मोदय चातुर्मास में बुधवार को धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए हुक्मगच्छाधिपति आचार्य श्री विजयराज जी म.सा. ने कहा कि संसार में मानव तीन प्रकार के होते हैं-जीवन को चलाने वाले, बनाने वाले एवं जीवन को सजाने वाले। जीवन को चलाने वाले साधारण मानव होते हैं, जीवन को बनाने वाले विशिष्ट एवं जीवन को सजाने वाले असाधारण मानव होते हैं। जीवन में संकटों में साथ देने वालों को, संकट पैदा करने वालों को एवं संकट में साथ छोड़ने वालों को भी कभी नहीं भूलना चाहिए। इन सबसे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए। उपाध्याय प्रवर श्री जितेश मुनि जी म.सा. ने गुणीजनों के प्रति सदैव प्रमोद भाव बनाए रखने की प्रेरणा दी। इस अवसर पर महाश्रमणीरत्ना श्री सूर्यकान्ता जी म.सा. के 82वें जन्म दिवस पर आचार्य प्रवर, उपाध्याय श्री जी एवं रत्नेश मुनि जी सहित सतीवृंद ने भी शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर महासती श्री कुमुद श्री जी, मुक्ताश्री जी, मयंकमणि जी, सिद्धिश्री जी व मनःप्रिया जी म.सा. ने भी विचार व्यक्त किए। श्रीमती सुशीला पोरवाल व विद्यावती मेहता ने भी विचार प्रकट किए। महाश्रमणीरत्ना जी म.सा. ने शुभकामनाओं हेतु सभी के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि मेरा ऐसा सौभाग्य हो कि आचार्य श्री के चरणों में संलेखना संथारे के साथ पंडित मरण को प्राप्त कर अंतिम मनोरथ पूर्ण करूं। उदयपुर श्रीसंघ के अध्यक्ष इंदर सिंह मेहता ने बताया कि आचार्य प्रवर की प्रातःकालीन अरिहंत बोधि क्लास के प्रथम दिन सुयं मे आउसं के तहत श्रवण से ज्ञान, श्रुत पर विस्तार से समझाया। प्रवचन पश्चात दोपहर साढ़े तीन बजे नवकार भवन में मांगलिक फरमाई, जिसमें सैंकड़ों श्रावक-श्राविकाओं की उपस्थिति रही।
संकट में साथ देने, संकट पैदा करने व साथ छोड़ने वालों को कभी नहीं भूलना चाहिए: आचार्य विजयराज
