उदयपुर 18 अगस्त / जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय डीम्ड टू बी विवि के संघटक विधि महाविद्यालय के नवप्रवेशित विद्यार्थियों से कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने संवाद कर उन्हें जीवन में आने वाली कठिनाईयों एवं सफलता के गुर सिखाये। इस अवसर पर प्रो. सारंगदेवोत ने महाविद्यालय से सम्बंधित कमियों एवं अच्छाईयों पर विधार्थियों से खुल कर चर्चा की। उन्होंने कहा कि विधार्थी जीवन में क्लास में शिक्षा का काफी महत्व है। नियमित कक्षा में आना अपने आप में एक अविस्मरणीय अनुभव है और इसका कोई दूसरा विकल्प नहीं है। मैकाले की शिक्षा पद्धति में रटने पर ज्यादा जोर था लेकिन नयी शिक्षा नीति में समझने एवं ज्ञानार्जन करने पर जोर दिया गया है जिससे हमारे विधार्थी जॉब सीकर नहीं, बल्कि जॉब प्रोवाईडर बनेंगे। उन्होंने कहा कि सुदूर गांवों में रह रहे आदिवासी, ग्रामीण एवं वंचित वर्ग को सुलभ न्याय दिलाने की जिम्मेदारी विधि के विधार्थियों की है। जागरूकता के अभाव में आज भी वे न्याय से वंचित हैं। उन्होंने भावी विधिवेत्ताओं का आव्हान किया कि अपने पेशे से किसी बेगुनाह को सजा न हो इस बात का पूरा ध्यान रखें और पूरी निष्ठा एवं ईमानदारी के साथ उसे न्याय दिलाने में मदद करें। आमजन को भी अपने अधिकारों के साथ साथ कर्तव्यों का भी पालन करना चाहिए।
प्रारंभ में प्राचार्य डॉ. कला मुणेत, डॉ. धमेन्द्र राजौरा, डॉ. के.के. त्रिवेदी, डॉ सुरेन्द्र सिंह चुण्डावत, नीरव पण्डया, डॉ. नेहा, डॉ. प्रतीक जांगीण, डॉ. मीता चौधरी, ज्ञानेश्वरी सिंह राठौड़, अंजु कावडिया, रितवी धाकड़, विनिता व्यास सहित कार्यकर्ता उपस्थित थे।
कुलपति प्रो. सारंगदेवोत ने विधि विद्यार्थियोें से किया संवाद
