उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ पंचायती नोहरा उदयपुर के तत्वावधान में आयोजित धर्म सभा में जैन संत प्रवर्तक सुकन मुनि ने कहा कि संसार एक परीक्षा भवन है। जीवन उसका प्रश्न पत्र है। प्रश्न पत्र के सभी प्रश्नों का उत्तर तीन घंटे में देना है। बचपन, जवानी और बुढापा ये तीन घंटे हैं। तीन घंटे पूर्ण होते ही प्रश्न पत्र समाप्त और परिणाम मृत्यु के रूप सामने होगा। हर व्यक्ति जीवन के प्रश्न को समाहित करने में लगा हुआ है। परीक्षार्थी वर्ष भर मेहनत करता है, पुरुषार्थ, परिश्रम करता है, विषय सम्बंधित किताबें पढ़ने में खपा लेता है तो प्रश्न पत्र हाथ में आते ही डरता नहीं है, परेशान नही होता, घबराता नही है बल्कि मुस्कुराता है। जो पढा, वो ही सवाल पूछे गए। मन लगाकर पढ़ा।
उन्होंने कहा कि हम ऐसे ही विद्यार्थी हैं। अंत समय में परिणाम का पता चल जाएगा। अपने अपने पुण्य और पुरुषार्थ पर निर्भर करता है कि परिणाम कैसा होगा। पुण्य भले ही कम किये लेकिन पुरुषार्थ सही दिशा में किया हो तो सफलता मिलेगी। क्या लिखना है सोच पर निर्भर है लेकिन लिखने के बाद मिटा नहीं सकते। जीवन का परिणाम आने वाला है। बारिश आने से पहले सब व्यवस्था करनी है। घर, खेत सुरक्षित करना है।
प्रवचन सभा को उप प्रवर्तक अमृतमुनि महाराज, महेश मुनि, अखिलेश मुनि तथा डॉ वरुण मुनि का भी सान्निध्य प्राप्त हुआ।
संसार परीक्षा भवन, जीवन उसका प्रश्न पत्रःसुकनमुनि
