उदयपुर 13 अप्रैल। शहर में आयोजित सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मूर्तिकला एवं चित्रकला कार्यशाला में तीसरे दिन कला वार्ता का आयोजन हुआ। कला वार्ता की शुरुआत पद्मश्री प्रेमजीत बारिया का मलयार्पण,उपरना और प्रशस्ति पत्र देकर इंस्पिरित आर्ट गेलेरी, पयरोटेक वर्क स्पेस सोल्युशन प्राईवेट लिमीटेड एवं कीरन सोनी गुप्ता (डायरेक्टर – वेस्ट ज़ोन कलचर आर्ट सेंटर) द्वारा सम्मानित किया गया। कला के मुख्य वक्ता प्रख्यात कला चिंतक कनु पटेल द्वारा संचालन में हुआ।
वार्ता में प्रो. सुरेश शर्मा ने प्रतिभागी कलाकारों एवं कला विद्यार्थीओ को सौन्दर्य चेतना के आयामो पर प्रकाश डाला।
अन्य वक्ता प्रो. शैल चोयल ने बताया कि हर व्यक्ति जन्मजात कलाकार होता है और उसमे सौन्दर्य को अभिव्यक्त करने की क्षमता अंतर्निहित होती है उसी प्रतिभा को अभिव्यक्त करना है। प्रो. रघुनाथ शर्मा ने अपने कला विचारों के व्यक्ति को संस्कार में आबद्ध होना चाहिए। अपने शास्त्रीय नियमों को समझ कर उसी अनुरूप मूल में अभिव्यक्त करना चाहिए। प्रो. लक्ष्मी नारायण वर्मा ने अपने अभिभाषण में कलाकार अपने मूल स्वरूप को पहचान कर अपनी अभिव्यक्ति करने को अन्य के लिए सम्प्रेषित हेतु दिशा बोध दिया।
अन्य वक्ता प्रो. श्रीनिवासन अय्यर ने संस्कृत साहित्य में संदर्भित कला उवाचो को रेखांकित करते हुए विद्यार्थियों को कला कर्म करते रहने की प्रेरणा दी। अन्य वक्ता डॉ दीपक सालवी ने विद्यार्थियों को प्रायोगिक कलाकर्म के साथ कला लेखन पर भी विशेष ध्यान देने की प्रेरणा दी उन्होंने कला के मूल तत्व को समझने पर बल दिया।
इसी वार्ता को आगे बढ़ाते हुए शहर केप्रसिद्ध वास्तुकार श्री सुनील लढ्ढा एवं कलाप्रेमी बाबू बाबेल ,ऋषभ बर्डिया ने कला के विंभिन्न परिपेक्ष्य को अभिव्यक्ति किया।
कला वार्ता में उपस्थित शहर के वरिष्ठ कलाकारों और अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय कलाकारों के साथ कला विद्यार्थियों भावेश सुथार, कमलेश डांगी, शिवांगी देवरा, खुशी ,एवं निधि यादव ने अपने प्रश्नों के जवाब पाकर अपनी कला जिज्ञासा को शांत किया।
