परिवार को बचाए रखने के लिए धैर्य एवं संयम की नितांत आवश्यकता होती है- उत्तम स्वामी
हर्षोल्लास के साथ आज मनाया जाएगा श्री कृष्ण जन्मोत्सव
निम्बाहेड़ा। अपने चरित्र का निर्माण करने के लिए सर्वप्रथम चरित्र को श्रवण करना चाहिए, उसके बाद उसका मनन कर उसको आत्मसात करना चाहिए, जिससे मन और बुद्धी सात्विक रह सकें। मन और बुद्धी के सात्विक रहने से परमात्मा की प्राप्ती होती है।
उक्त उद्गार राजराजेश्वरी पदमावति शक्तिपीठ बांसवाड़ा के संस्थापक एवं ध्यानयोगी महर्षि श्री श्री १००८ श्री उत्तम स्वामी जी महाराज ने बुधवार को समीपवर्ती ग्राम मण्डावली में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन भक्त ध्रुव, प्रहलाद एवं जड़ भरत आख्यान, सती चरित्र के प्रसंग सहित विभिन्न प्रसंगो एवं दृष्टान्तों की विवेचना के दौरान व्यक्त किए।
उन्होनें कहा कि किसी भी स्थान पर बिना निमंत्रण जाने से पहले इस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए कि जहां आप जा रहे है वहां आपका, अपने इष्ट या अपने गुरु का अपमान हो। यदि ऐसा होने की आशंका हो तो उस स्थान पर नहीं जाना चाहिए, चाहे वह स्थान अपने जन्म दाता पिता का ही घर क्यों ना हो। स्वामी जी ने कहा कि कई प्रकार के अहंकारों से ग्रसीत होने के कारण मनुष्य जीवन में बहुत दु:खी होता है और वह अपने पथ से भ्रष्ट हो जाता है।
महर्षि उत्तम स्वामी ने उत्तानपाद के वंश में ध्रुव चरित्र की कथा को सुनाते हुए समझाया कि जिस प्रकार ध्रुव की सौतेली मां सुरुचि के द्वारा अपमानित होने पर भी उसकी मां सुनीति ने धैर्य नहीं खोया, जिससे एक बहुत बड़ा संकट टल गया। उसी प्रकार परिवार को बचाए रखने के लिए धैर्य संयम की नितांत आवश्यकता रहती है। उन्होने कहा कि भक्ति के लिए कोई उम्र बाधा नहीं है। भक्ति को बचपन में ही करने की प्रेरणा देनी चाहिए, क्योंकि बचपन कच्चे मिट्टी की तरह होता है उसे जैसा चाहे वैसा पात्र बनाया जा सकता है।
कथा के दौरान स्वामी जी ने बताया कि पाप के बाद कोई व्यक्ति नरकगामी हो, इसके लिए श्रीमद् भागवत में श्रेष्ठ उपाय प्रायश्चित बताया है। अजामिल आख्यान के माध्यम से इस बात को विस्तार से समझाया तथा भक्त प्रहलाद चरित्र की कथा सुनाते हुए सदैव ईश्वर की शरण में रहते हुए परमपिता परमात्मा पर विश्वास रखना चाहिए। जीवन में कभी अमृत्व को प्राप्त करना है तो ईश्वर, गुरू, माता पिता की सेवा के साथ ही श्रीमद् भागतव कथा का अमृतपान करना चाहिए।
कथा वाचन के दौरान ध्यानयोगी महर्षि उत्तम स्वामी जी महाराज के संगीतमय भजनों के प्रस्तुतीकरण से कथा पाण्डाल में मौजूद श्रद्धालु स्त्री, पुरूष नृत्य भी करते रहे।
तीसरे दिन की कथा आरम्भ होने से पूर्व आयोजनकर्ता भूरालाल शिवनारायण धाकड़ परिवार द्वारा श्रीमद् भावगत ग्रंथ की पूजा अर्चना के साथ व्यासपीठ पर वीराजीत श्री श्री 1008 श्री उत्तम स्वामी जी महाराज का स्वागत किया गया। कार्यक्रम का संचालन पश्चिम मण्डल अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह शक्तावत ने किया।
इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के राजेन्द्र सिंह, विश्वजीत, पूर्व स्वायत्त शासन मंत्री श्रीचन्द कृपलानी, कपासन विधायक अर्जुनलाल जीनगर, पूर्व विधायक अशोक नवलखा, पंचायत समिति प्रधान बगदीराम धाकड़, छोटीसादड़ी पूर्व प्रधान महावीर सिंह कृष्णावत, कपासन पूर्व प्रधान मोहब्बत सिंह, कैलाश सिंह बडौली, छोटीसादड़ी पूर्व अध्यक्ष प्रहलादराय साहू, सुरेश खेरोदिया, ललित शारदा, पूर्व जिलाध्यक्ष भाजयुमो हर्षवर्धन सिंह रुद, समाजसेवी रोशनलाल चीपड, एडवोकेट अमित नाहर चित्तौडग़ढ़, छोटीसादड़ी मण्डल अध्यक्ष रमेश गोपावत, बगदीराम शर्मा, प्रतापगढ़ के सत्यनारायण बाहेती, प्रकाश टांक, राजेश टेलर, पूर्वी मण्डल अध्यक्ष अशोक जाट, वरदीचंद धाकड़, छोटीसादड़ी जिप सदस्य दलपत कुमार मीणा, भाजयुमो चित्तौडग़ढ़ जिला उपाध्यक्ष अर्जुनसिंह राठौड़, भाजपा ओबीसी प्रकोष्ठ जिला उपाध्यक्ष गोपाल वैष्णव, नगर मण्डल महामंत्री विजय काबरा, उपाध्यक्ष देवकरण समदानी, महेंद्र सिंह देवड़ा, चंद्रमोहन गुप्ता, गणेशदान चारण, बद्रीदान चारण, किशनलाल धाकड़, विधानसभा बूथ प्रभारी रत्नेश छाजेड़, मोतीलाल चारण, भाजयुमो नगर अध्यक्ष कपिल चौधरी, भाजयुमो पश्चिम मण्डल के लोकेश जाट, नरेन्द्र प्रजापत, नवल किशोर गुवार, रमेश वैष्णव सहित सैंकडों की संख्या में श्रद्धालु स्त्री, पुरूष एवं युवा भक्तजनों मौजूद रह कर कथा का अमृतपान किया। तिसरे दिन की कथा के समापन पर महाआरती के पश्चात श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया।
आज होगा भगवान श्री कृष्ण जन्मोत्सव का वाचन
कथा आयोजक भूरालाल धाकड़ ने श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन की जानकारी देते हुए बताया कि 5 जनवरी, गुरूवार को भगवान श्री कृष्ण जन्मोत्सव प्रसंग का संगीतमय वाचन किया जाएगा।
श्रीमद् भागवत कथा आयोजनकर्ता भुरालाल, शिवनारायण धाकड़ परिवार एवं मण्डावली ग्रामवासियों ने क्षेत्र के समस्त धर्मप्रेमियों से अधिक से अधिक संख्या में आज आयोजित होने वाले भगवान श्री राम एवं श्री कृष्ण जन्मोत्सव के पावन महोत्सव में प्रभु दर्शनार्थ एवं श्रीमद् भागवत कथा के अमृत रसपान का आव्हान किया है।
